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मॉनसून सत्र में विपक्ष का बड़ा एजेंडा, राम मंदिर, NEET और परिसीमन पर घिर सकती है सरकार

मॉनसून सत्र से पहले कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। NEET, शिक्षा व्यवस्था, राम मंदिर, सर्वदलीय बैठक और परिसीमन बिल को लेकर सरकार को घेरने की बात कही।

मॉनसून सत्र में विपक्ष का बड़ा एजेंडा, राम मंदिर, NEET और परिसीमन पर घिर सकती है सरकार
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नई दिल्ली। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस सांसद और महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस बार संसद में राम मंदिर, नीट (NEET), परीक्षा प्रणाली, शिक्षा व्यवस्था और प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) जैसे कई अहम मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक बदलावों की तैयारी कर रही है।

शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा

जयराम रमेश ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार परीक्षा विवादों और अनियमितताओं के कारण युवाओं का भविष्य असमंजस में है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री व्यवस्था को सुधारने में विफल रहे हैं और छात्रों तथा अभ्यर्थियों का भरोसा लगातार कमजोर हुआ है। कांग्रेस का कहना है कि मॉनसून सत्र में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

सर्वदलीय बैठक पर भी साधा निशाना

सर्वदलीय बैठक का जिक्र करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे, लेकिन अंतिम निर्णय बैठक में मौजूद नेताओं के बजाय प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के स्तर पर लिए जाते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न राजनीतिक दल बैठक में अपनी चिंताएं रखते हैं और मंत्री उन्हें सुनते हैं, लेकिन महत्वपूर्ण फैसले बाद में सरकार के शीर्ष नेतृत्व द्वारा किए जाते हैं। कांग्रेस ने मांग की कि संसद के महत्वपूर्ण विषयों पर सभी दलों से गंभीर और सार्थक संवाद होना चाहिए।

परिसीमन बिल को लेकर जताई आशंका

जयराम रमेश ने कहा कि 17 अप्रैल को सरकार लोकसभा में परिसीमन विधेयक पर दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी। उनका आरोप है कि अब सरकार राजनीतिक दलों में टूट कराकर आवश्यक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) में राजनीतिक घटनाक्रम इसी रणनीति का हिस्सा हैं। कांग्रेस का मानना है कि सरकार मॉनसून सत्र के दौरान दोबारा परिसीमन विधेयक पेश कर सकती है।

दक्षिण और पश्चिमी राज्यों को लेकर चिंता

कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है ताकि प्रस्तावित बदलावों पर व्यापक चर्चा हो सके।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी चिंता यह है कि परिसीमन की प्रक्रिया से दक्षिण और पश्चिम भारत के उन राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू किया है। उनका तर्क है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को किसी भी स्थिति में दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

जयराम रमेश ने कहा कि यह केवल वर्तमान राजनीति का नहीं बल्कि अगले 20 से 30 वर्षों के संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा है। इसलिए इस विषय पर जल्दबाजी के बजाय व्यापक सहमति और संवैधानिक संतुलन के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए।


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