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चाहकर भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोल पा रहा ईरान? बारूदी सुरंगें बिछाकर खुद भूल गया लोकेशन

इस्लामाबाद में चल रही उच्च-स्तरीय वार्ता में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस आमने-सामने हैं। इस हफ्ते अराघची ने कहा था कि जलमार्ग को तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए खोला जाएगा।

चाहकर भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोल पा रहा ईरान? बारूदी सुरंगें बिछाकर खुद भूल गया लोकेशन
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तेहरान। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का आयोजन किया जा रहा है। इससे ठीक पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ईरान को लेकर नए खुलासे हुए हैं। ये खुलासे भारत सहित दुनिया के उन देशों की चिंता बढ़ा सकता है, जिनके तेल टैंकरों से लदे जहाज इस समुद्री मार्ग से निकलते हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से न खोल पाने के पीछे ईरान की कोई कूटनीतिक चाल नहीं, बल्कि एक गंभीर तकनीकी दिक्कत है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा जा रहा है कि पिछले महीने युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने आनन-फानन में छोटी नावों के जरिए होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाई थीं। ईरान ने इन सुरंगों को बिछाते समय उनका सटीक रिकॉर्ड नहीं रखा। कई सुरंगें ऐसी तकनीक से बिछाई गईं जो समुद्री धाराओं के साथ अपना स्थान बदल लेती हैं।

इसका मतलब है कि जो रास्ता कल सुरक्षित था, वह आज घातक हो सकता है। ईरान के पास इन सुरंगों को खोजने और सुरक्षित रूप से हटाने के लिए आवश्यक आधुनिक तकनीक और जहाजों की कमी है।

इस्लामाबाद में चल रही उच्च-स्तरीय वार्ता में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस आमने-सामने हैं। इस हफ्ते अराघची ने कहा था कि जलमार्ग को तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए खोला जाएगा। अब स्पष्ट हो गया है कि यह तकनीकी सीमा दरअसल वे बारूदी सुरंगें हैं जिनका पता खुद ईरान को भी नहीं है।राष्ट्रपति ट्रंप ने शर्त रखी है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल होगी। हालांकि, ईरान चाहकर भी इस मांग को तुरंत पूरा करने की स्थिति में नहीं है।

अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में उठ सकता है मुद्दा

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के लिए यह स्थिति एक बड़ी बाधा साबित हो रही है। दरअसल, अमेरिका ने मांग की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य को आवागमन के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाए। यह मुद्दा ईरानी वार्ताकारों और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के बीच पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता के लिए भी एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

बारूदी सुरंगों से बनाया दबाव, अब वही बनीं सिरदर्द

अमेरिका-इस्राइल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के बाद तेहरान ने छोटी नावों का इस्तेमाल कर होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगों का जाल बिछाया था। इन बारूदी सुरंगों के साथ-साथ ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों और अन्य जहाजों की संख्या को काफी कम कर दिया था।

इसकी वजह से ऊर्जा की कीमतें बढ़ गईं और ईरान को युद्ध में अपनी स्थिति मजबूत करने का एक बड़ा मौका मिला। हालांकि, ईरान ने होर्मुज में एक रास्ता खुला छोड़ दिया था, जिससे शुल्क का भुगतान करने वाले जहाजों को गुजरने की अनुमति मिल गई थी।

आईआरजीसी ने जारी की चेतावनी

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने जहाजों को समुद्री बारूदी सुरंगों से टकराने की चेतावनी जारी की है। वहीं, अर्ध-सरकारी समाचार संगठनों ने सुरक्षित मार्गों को दिखाने वाले चार्ट जारी किए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि ये सुरक्षित मार्ग सीमित हैं, जिसका एक बड़ा कारण यह है कि ईरान ने जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों को अव्यवस्थित तरीके से बिछाया था।

भारत की भी बढ़ेगी चिंता

दुनिया के कुल तेल और एलएनजी (LNG) व्यापार का 20% इसी मार्ग से गुजरता है। भारत के लिए यह खबर चिंताजनक है क्योंकि 8 अप्रैल के युद्धविराम के बाद उम्मीद थी कि कतर और अन्य देशों से आपूर्ति बहाल होगी। लेकिन माइनफील्ड के कारण टैंकरों को भेजने में शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां हिचकिचाएंगी।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी अपनी माइन-स्वीपिंग तकनीक का उपयोग भी करें, तो भी पूरे जलमार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने में हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है।


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