भारत-ऑस्ट्रेलिया के रणनीतिक रिश्तों को नई उड़ान, परमाणु ऊर्जा से रक्षा सहयोग तक हुए अहम समझौते
मेलबर्न शिखर वार्ता में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा, साइबर सुरक्षा, गगनयान मिशन और व्यापार सहित कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक पर साझा दृष्टि
दोनों देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी करते हुए नियमित रणनीतिक संवाद, उन्नत सैन्य अभ्यासों और सेनाओं के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया। नेताओं ने स्वतंत्र, शांतिपूर्ण और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
समुद्री सुरक्षा, साइबर तकनीक और नवाचार को बढ़ावा
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने संयुक्त समुद्री सुरक्षा रोडमैप को मंजूरी दी। साथ ही साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति शृंखलाओं को सुदृढ़ करने के लिए नई साझेदारियों की घोषणा की गई। ऑस्ट्रेलिया, भारत और कनाडा के बीच उभरती तकनीकों व नवाचार के क्षेत्र में त्रिपक्षीय सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर हुए।
गगनयान मिशन को मिलेगा सहयोग
विज्ञान एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग के तहत ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप पर अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा, जिससे भारत के गगनयान मिशन को तकनीकी सहायता प्राप्त होगी।
ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग का विस्तार
पश्चिम एशिया की परिस्थितियों के मद्देनजर दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा पर साझा रणनीति अपनाई। स्वच्छ ऊर्जा, नवीकरणीय संसाधनों और विद्युत आधारित ऊर्जा प्रणालियों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। वर्ष 2015 के परमाणु सहयोग समझौते के तहत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति का मार्ग भी और सुगम हुआ है।
व्यापार और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2022 के आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को शीघ्र अंतिम रूप देने की दिशा में काम तेज किया जाएगा। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के विरुद्ध साझा संघर्ष और वैश्विक विवादों के समाधान के लिए संवाद एवं कूटनीति को सर्वोत्तम माध्यम बताया।


