Top
Begin typing your search above and press return to search.

भारत-जर्मनी में डीप-टेक और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर बनी बड़ी सहमति: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और जर्मन प्रतिनिधिमंडल की बैठक में हुआ अहम फैसला

भारत और जर्मनी ने भविष्य की तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को भारत दौरे पर आए जर्मनी के थुरिंगिया राज्य के मंत्री-प्रेसिडेंट मारियो वोग्ट के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच क्वांटम कम्युनिकेशन, फोटोनिक्स, क्वांटम सैटेलाइट संचार, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, डीप-टेक इनोवेशन और उद्योग-आधारित अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

भारत-जर्मनी में डीप-टेक और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर बनी बड़ी सहमति: केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और जर्मन प्रतिनिधिमंडल की बैठक में हुआ अहम फैसला
X

नई दिल्ली। भारत और जर्मनी ने भविष्य की तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को भारत दौरे पर आए जर्मनी के थुरिंगिया राज्य के मंत्री-प्रेसिडेंट मारियो वोग्ट के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच क्वांटम कम्युनिकेशन, फोटोनिक्स, क्वांटम सैटेलाइट संचार, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, डीप-टेक इनोवेशन और उद्योग-आधारित अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

बयान में कहा गया है कि बैठक में दोनों देशों की सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और वैज्ञानिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

इस दौरान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2024 में भारत-जर्मनी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के 50 वर्ष पूरे हुए थे और यह साझेदारी आज दोनों देशों के संबंधों का एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है।

बैठक में थुरिंगिया को यूरोप के प्रमुख फोटोनिक्स, ऑप्टिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मान्यता देते हुए दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और जर्मनी की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं और इनके संयुक्त प्रयासों से वैश्विक स्तर की तकनीकें विकसित की जा सकती हैं।

चर्चा के दौरान क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन, क्वांटम नेटवर्क और उन्नत फोटोनिक्स तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। जर्मनी की ओर से यूरोप में चल रही क्वांटम कम्युनिकेशन और ऑप्टिकल कम्युनिकेशन परियोजनाओं, विशेष रूप से यूरोओजीएस नेटवर्क की जानकारी भी साझा की गई।

डॉ. सिंह ने भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत हासिल की गई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सुरक्षित क्वांटम संचार और संबंधित तकनीकों के विकास में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दोनों देशों ने क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, मानक निर्माण, प्रतिभा आदान-प्रदान और तकनीकी साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। उन्होंने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) और उद्योग आधारित रिसर्च को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और बायोटेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए विशाल अवसर उपलब्ध हैं।

बयान में आगे कहा गया कि बैठक में अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। डॉ. सिंह ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (डीएलआर) के बीच लंबे समय से चल रही साझेदारी का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत अब तक अपने प्रक्षेपण यानों के जरिए 11 जर्मन उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण कर चुका है।

दोनों पक्षों ने सैटेलाइट संचार, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, मानव अंतरिक्ष मिशन, माइक्रोग्रैविटी रिसर्च, पृथ्वी अवलोकन, ड्रोन तकनीक और भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की।

जर्मनी की ओर से भारतीय और जर्मन शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ाने तथा संयुक्त डिग्री कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। दोनों देशों ने वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, स्टार्टअप उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं के बीच सहयोग को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत ऐसे सभी सहयोगों का स्वागत करता है जो शोध, नवाचार, तकनीकी विकास और व्यावसायीकरण को गति दें तथा दोनों देशों के युवाओं और वैज्ञानिक समुदाय के लिए नए अवसर पैदा करें।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि सरकारों, वैज्ञानिक संस्थानों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच बढ़ता सहयोग भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। साथ ही, यह नवाचार-आधारित विकास, तकनीकी प्रगति और वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।



Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it