गगन में लहराया भारत का परचम! पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' की सफल उड़ान, अंतरिक्ष क्षेत्र में बना नया इतिहास
भारत की पहली निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने विक्रम-1 ऑर्बिटल रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया। मिशन आगमन की सफलता के साथ भारत अमेरिका और चीन के बाद निजी ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने वाला तीसरा देश बना।

नई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। देश की पहली निजी स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने स्वदेशी ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट 'विक्रम-1' का सफल प्रक्षेपण कर भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जहां निजी कंपनियां ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने में सफल रही हैं।
इस सफलता के साथ भारत ने अमेरिका और चीन के बाद तीसरे देश के रूप में यह उपलब्धि हासिल की है। इस ऐतिहासिक मिशन को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया, जो भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग के नए युग की शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से भरी सफल उड़ान
शनिवार दोपहर 12:08 बजे आंध्र प्रदेश स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रथम लॉन्च पैड से विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक उड़ान भरी। लॉन्च के साथ ही कंट्रोल सेंटर में मौजूद वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने तालियों के बीच इस सफलता का स्वागत किया। मिशन का प्रमुख उद्देश्य रॉकेट को लगभग 450 किलोमीटर की लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करना और उड़ान से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी आंकड़े एकत्र करना था।
कई महत्वपूर्ण पेलोड लेकर पहुंचा अंतरिक्ष
'मिशन आगमन' केवल एक परीक्षण उड़ान नहीं था, बल्कि यह कई महत्वपूर्ण पेलोड भी अपने साथ लेकर गया। रॉकेट में ग्रेहा स्पेस, कॉस्मोसर्व, डीक्यूब्ड और स्काईरूट के स्कोप सैटेलाइट जैसे तकनीकी पेलोड शामिल थे। इसके अलावा बेंगलुरु की कंपनी कॉस्मोस डायमंड्स द्वारा तैयार किया गया 'कॉस्मिक ब्लूम' नामक लैब-ग्रोन डायमंड आर्ट पीस और एक माइक्रो आर्टवर्क भी अंतरिक्ष में भेजा गया।
मिशन की एक विशेष आकर्षक बात यह भी रही कि रॉकेट अपने साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित पोस्टकार्ड भी लेकर गया। लॉन्च से लेकर सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने तक की पूरी प्रक्रिया लगभग 15 मिनट 46 सेकंड में पूरी की गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
लॉन्च से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को शुभकामनाएं देते हुए इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा का नया अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन देश के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और उद्यमशीलता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से #IndiaWithVikram1 अभियान के जरिए इस उपलब्धि का जश्न मनाने की भी अपील की।
निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि
विक्रम-1 का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है। यह रॉकेट आधुनिक तकनीकों से लैस है और छोटे उपग्रहों को कम लागत में अंतरिक्ष में स्थापित करने की क्षमता रखता है। वर्ष 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों और IN-SPACe की स्थापना के बाद निजी कंपनियों के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
स्काईरूट एयरोस्पेस इससे पहले वर्ष 2022 में विक्रम-S सब-ऑर्बिटल मिशन के जरिए अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन कर चुकी थी। अब विक्रम-1 की सफलता के बाद कंपनी वैश्विक कमर्शियल लॉन्च मार्केट में मजबूत दावेदारी पेश करने की तैयारी में है।
भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफलता से भारत का निजी स्पेस सेक्टर नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। इससे स्टार्टअप्स, अंतरिक्ष अनुसंधान, उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही भारत वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में अपनी भागीदारी और प्रभाव को और मजबूत कर सकेगा।


