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भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पूरा होने के करीब, भविष्य की हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए बनेगा मॉडल

भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है। सरकार ने शुक्रवार को कहा कि यह परियोजना देश में बनने वाले भविष्य के सभी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए एक मानकीकृत मॉडल (स्टैंडर्ड टेम्पलेट) का काम करेगी।

भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पूरा होने के करीब, भविष्य की हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए बनेगा मॉडल
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नई दिल्ली। भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच रही है। सरकार ने शुक्रवार को कहा कि यह परियोजना देश में बनने वाले भविष्य के सभी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए एक मानकीकृत मॉडल (स्टैंडर्ड टेम्पलेट) का काम करेगी।

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना के पूरा होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय घटकर करीब 1 घंटा 58 मिनट रह जाएगा। इस कॉरिडोर की डिजाइन स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि ट्रेनों की संचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसके लिए अत्याधुनिक रोलिंग स्टॉक, सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।

करीब 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर में 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। परियोजना के तहत पहली बुलेट ट्रेन सेवा अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। शुरुआती चरण में ट्रेन सूरत और वापी के बीच संचालित की जाएगी।

सरकार का कहना है कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट केवल एक परिवहन परियोजना नहीं है, बल्कि यह भविष्य में देश भर में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए आवश्यक तकनीकी ज्ञान, कौशल और औद्योगिक इकोसिस्टम भी तैयार कर रही है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, यह परियोजना भविष्य में बनने वाले हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए एक स्केलेबल मॉडल स्थापित कर रही है, जिससे आने वाली परियोजनाओं में बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, यात्रा का समय कम होगा और देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को भी गति मिलेगी।

सरकार ने भविष्य के लिए लगभग 4,000 किलोमीटर लंबे सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की पहचान की है। इन परियोजनाओं में लगभग 16 लाख करोड़ रुपए के निवेश की संभावना जताई गई है।

मुंबई-अहमदाबाद परियोजना के अनुभव के आधार पर भविष्य की परियोजनाओं में एक समान इंजीनियरिंग डिजाइन, निर्माण तकनीक और संचालन प्रणाली अपनाई जाएगी, जिससे परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी और निर्माण की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

सरकार ने कहा कि एक समान डिजाइन, उपकरण और रख-रखाव प्रक्रियाओं के चलते स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और खरीद प्रक्रिया को भी आसान बनाया जा सकेगा। हालांकि, प्रत्येक स्थान की मिट्टी की प्रकृति के अनुसार नींव तैयार की जाएगी, जबकि अन्य सभी प्रमुख ढांचे समान इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप होंगे।

इन मानकों में पिलर, वायाडक्ट, ट्रैक, स्टेशन संरचना, ओवरहेड विद्युतीकरण और सिग्नलिंग सिस्टम शामिल होंगे। सरकार का मानना है कि इस मानकीकृत व्यवस्था से भविष्य के हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण तेज होगा, गुणवत्ता में सुधार आएगा और परियोजनाओं की लागत भी कम होगी।



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