Top
Begin typing your search above and press return to search.

भारत के पास कितने दिनों के लिए तेल का स्टॉक बाकी? अफवाहों के बीच सरकार ने दिया सही डाटा

भारत केवल कच्चे तेल पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि उसके पास तैयार उत्पादों का भी पर्याप्त स्टॉक है। कच्चा तेल के अलावा, पेट्रोल और डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल जिसका इस्तेमाल विमानों के लिए ईंधन के तौर पर किया जाता है।

भारत के पास कितने दिनों के लिए तेल का स्टॉक बाकी? अफवाहों के बीच सरकार ने दिया सही डाटा
X

नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के द्वारा लगातार हो रहे हमले के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। कई शहरों में पेट्रोल पंप पर लंबी कतारें देखी गईं। वाहन मालिक ईंधन का स्टॉक करने में व्यस्त हैं। इस बीच केंद्र सरकार की तरफ से एक स्पष्टीकरण जारी किया गया है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर तेल की कमी को लेकर फैली अफवाहों के बीच यह काफी महत्वपूर्ण है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास वर्तमान में 25 करोड़ बैरल (लगभग 4,000 करोड़ लीटर) कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का संयुक्त भंडार है। यह मात्रा पूरे देश की जरूरतों को 7 से 8 सप्ताह (लगभग 50-60 दिन) तक पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

भारत ने अपना तेल भंडार किसी एक जगह रखने के बजाय रणनीतिक रूप से पूरे देश में फैलाए हुए है। मैंगलोर, पादुर और विशाखापत्तनम में विशेष भूमिगत भंडारण सुविधाएं बनाए गए हैं। रिफाइनरियों और डिपो में विशाल टैंक बनाए गए हैं। हजारों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनों में हर वक्त मौजूद रहने वाला तेल भी भारत के पास मौजूद है। इसके अलावा समुद्र में भारतीय बंदरगाहों की ओर कई विशाल तेल टैंकर आ रहे हैं।

भंडार में क्या-क्या शामिल है?

भारत केवल कच्चे तेल पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि उसके पास तैयार उत्पादों का भी पर्याप्त स्टॉक है। कच्चा तेल के अलावा, पेट्रोल और डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल जिसका इस्तेमाल विमानों के लिए ईंधन के तौर पर किया जाता है। एलपीजी और एलएनजी का भी प्रयाप्त स्टॉक है।

सरकार ने उन दो प्रमुख दावों को पूरी तरह गलत बताया है जो जनता में पैनिक पैदा कर रहे थे। पहला दावा यह किया जा रहा था कि वैश्विक तेल आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई है। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा था कि भारत के पास केवल 25 दिनों का रिजर्व बचा है। हालांकि, हकीकत यह है कि भारत अभी भी कई वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं (रूस, इराक, यूएई आदि) से तेल प्राप्त कर रहा है। सप्लाई चेन के सभी हिस्सों को मिलाकर भारत के पास 50-60 दिनों का बैकअप है, जो अल्पकालिक व्यवधानों से निपटने के लिए पर्याप्त है।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बावजूद, भारत की ऊर्जा कूटनीति और रणनीतिक भंडारण नीति ने देश को एक सुरक्षित कवच प्रदान किया है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे घबराहट में आकर ईंधन का भंडारण न करें, क्योंकि देश में आपूर्ति श्रृंखला सामान्य रूप से काम कर रही है।

भारत में फिलहाल कच्चे तेल को लेकर कोई मारामारी नहीं

अधिकारी ने बताया कि भारत 2022 से रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। उस समय भारत के कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी केवल 0.2 प्रतिशत थी। लेकिन अब इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि फरवरी में भारत ने अपने कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20 प्रतिशत रूस से खरीदा। फरवरी में रूस से भारत ने करीब 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (1.04 मिलियन बैरल प्रति दिन) कच्चा तेल आयात किया।

'एमआरपीएल रिफाइनरी बंद होने की खबरें गलत'

सरकारी अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि एमआरपीएल रिफाइनरी बंद होने की खबरें गलत हैं। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और एलपीजी बनाने वाली सभी रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल देश में एलपीजी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, इसलिए उपभोक्ताओं को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। अधिकारी ने बताया कि सरकार जरूरत पड़ने पर पेट्रोकेमिकल उत्पादों का इस्तेमाल भी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए करेगी, ताकि किसी भी तरह की कमी न हो।

  • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का उत्पादन अधिकतम करें और घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दें।
  • इसके तहत रिफाइनरियों से कहा गया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी महत्वपूर्ण गैसों का इस्तेमाल प्राथमिकता से एलपीजी उत्पादन में किया जाए, ताकि घरों में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस की कमी न हो।
  • मध्य पूर्व में युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग मार्गों पर असर पड़ा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (तेल और गैस के वैश्विक व्यापार का अहम मार्ग) से टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
  • इस युद्ध के चलते दुनिया के दूसरे सबसे बड़े एलएनजी निर्यातक कतर से भी गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि भारत सरकार का कहना है कि मौजूदा स्थिति में देश के पास पर्याप्त ऊर्जा भंडार है और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it