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होर्मुज खुलने से भारत को राहत, फंसे 34 जहाजों को मिल सकती है मंजूरी

अमेरिका-ईरान तनाव कम होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय एलएनजी जहाज ‘दिशा’ सुरक्षित बाहर निकला। अब फारस की खाड़ी में फंसे 34 अन्य जहाजों को भी हरी झंडी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

होर्मुज खुलने से भारत को राहत, फंसे 34 जहाजों को मिल सकती है मंजूरी
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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा युद्धविराम समझौते के बाद भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला एलएनजी जहाज ‘दिशा’ तीन महीने से अधिक समय बाद युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर चुका है। यह जहाज 18 जून को गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही फारस की खाड़ी में फंसे 34 अन्य जहाजों के संचालन का रास्ता भी खुलता नजर आ रहा है।

भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड (SCI) के नेतृत्व वाले समूह द्वारा संचालित ‘दिशा’ लगभग 62,370 टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है। यह अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद होर्मुज से गुजरने वाले शुरुआती वाणिज्यिक जहाजों में शामिल है।

ऊर्जा आपूर्ति में सुधार की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि जहाजों की आवाजाही शुरू होने से भारत को तेल और गैस आपूर्ति के मोर्चे पर राहत मिलेगी। हालांकि पूरी स्थिति सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है। युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र के कई ऊर्जा संयंत्रों को नुकसान पहुंचा है, जिससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।

भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया पर निर्भर है। देश अपने कुल कच्चे तेल का बड़ा भाग आयात करता है, जबकि एलएनजी आयात का अधिकांश हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है।

कतर और यूएई के संयंत्रों पर असर

रिपोर्टों के अनुसार, कतर के रास लफ्फान और यूएई के हबशान गैस प्लांट को भी संघर्ष के दौरान नुकसान पहुंचा। हबशान प्लांट फिलहाल आंशिक क्षमता पर काम कर रहा है, जबकि कई इकाइयों की मरम्मत अभी जारी है। ऐसे में गैस आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है।

फारस की खाड़ी में फंसे कई जहाज उर्वरक, एलएनजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खेप लेकर खड़े हैं। इनके परिचालन शुरू होने से भारत सहित कई देशों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।

18 हजार भारतीय नाविक खाड़ी क्षेत्र में तैनात

पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में इस समय करीब 18,000 भारतीय नाविक कार्यरत हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन संचालित की जा रही है। अब तक 3,500 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है।

मंत्रालय ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास फिलहाल 13 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिन पर लगभग 325 भारतीय नाविक तैनात हैं। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भारतीय जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।


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