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गुरमीत राम रहीम को 21 दिन की फरलो, 17वीं बार जेल से बाहर आया दुष्कर्म का दोषी

गुरमीत राम रहीम को 21 दिन की फरलो मिली है। 2020 के बाद यह उसकी 17वीं अस्थायी रिहाई है। जानें उसका पैरोल-फरलो रिकॉर्ड और रिहाई से जुड़े नियम।

गुरमीत राम रहीम को 21 दिन की फरलो, 17वीं बार जेल से बाहर आया दुष्कर्म का दोषी
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नई दिल्ली। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 21 दिन की फरलो मंजूर होने के बाद मंगलवार सुबह हरियाणा की सुनारिया हाई सिक्योरिटी जेल से बाहर लाया गया। वह करीब सुबह 6:05 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच जेल परिसर से निकला और सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ। राम रहीम को दुष्कर्म और हत्या के मामलों में सजा सुनाई जा चुकी है।

2020 के बाद 17वीं अस्थायी रिहाई

राम रहीम की यह 2020 के बाद 17वीं पैरोल या फरलो है। इससे पहले वह 26 जून को 30 दिन की पैरोल पूरी करके सुनारिया जेल लौटा था। करीब दो महीने से भी कम समय के अंतराल में उसे एक बार फिर अस्थायी रिहाई मिल गई है। बार-बार पैरोल और फरलो मिलने को लेकर राम रहीम की रिहाई लंबे समय से सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का विषय रही है।

दुष्कर्म और हत्या के मामलों में काट रहा सजा

गुरमीत राम रहीम को अगस्त 2017 में दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद उसे पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या सहित अन्य मामलों में भी सजा सुनाई गई। वह रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है।

17 अस्थायी रिहाइयों का रिकॉर्ड

उपलब्ध जेल रिकॉर्ड के मुताबिक, राम रहीम को 2020 से अब तक कुल 17 बार अस्थायी रिहाई मिल चुकी है। इनमें अक्टूबर 2020 में एक दिन की रिहाई, मई 2021 में मां से मिलने के लिए 12 घंटे, फरवरी 2022 में 21 दिन और जून 2022 में 30 दिन की रिहाई शामिल है।

इसके बाद अक्टूबर 2022 में 40 दिन, जनवरी 2023 में 40 दिन, जुलाई 2023 में 30 दिन और नवंबर 2023 में 21 दिन की अस्थायी रिहाई मिली। जनवरी 2024 में 50 दिन, अगस्त में 21 दिन और अक्टूबर में 20 दिन की रिहाई हुई। वर्ष 2025 में जनवरी में 30 दिन, अप्रैल में 21 दिन और अगस्त में 40 दिन की रिहाई मिली। 2026 में जनवरी में 40 दिन, मई में 30 दिन और अब अगस्त में 21 दिन की फरलो दी गई है।

किस नियम के तहत मिलती है पैरोल और फरलो?

राम रहीम की अस्थायी रिहाई हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्परेरी रिलीज) एक्ट, 2022 के प्रावधानों के तहत होती है। नियमों के अनुसार पात्र कैदियों को निर्धारित शर्तों और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के आधार पर पैरोल और फरलो मिल सकती है। हालांकि, गंभीर अपराधों में सजा काट रहे राम रहीम को बार-बार अस्थायी रिहाई मिलने के कारण इस प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।


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