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इटली की पीएम मेलोनी का दिलचस्प खुलासा, बोलीं- 'दिल्ली से चुनाव लड़ती तो मिलते 10 लाख वोट'

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी नई किताब 'जॉर्जिया विजन' में भारत दौरे का रोचक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि दिल्ली में लगे पोस्टरों को देखकर मजाक में कहा गया कि अगर वह चुनाव लड़तीं तो 10 लाख वोट जीत जातीं।

इटली की पीएम मेलोनी का दिलचस्प खुलासा, बोलीं- दिल्ली से चुनाव लड़ती तो मिलते 10 लाख वोट
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नई दिल्लीइटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी नई पुस्तक ‘जॉर्जिया विजन’ में भारत यात्रा से जुड़ा एक रोचक और हल्का-फुल्का अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में नई दिल्ली के दौरे के दौरान राजधानी की सड़कों पर उनके स्वागत में लगे पोस्टरों को देखकर इटली के उप-प्रधानमंत्री एंटोनियो ताजानी ने मजाक में कहा था कि यदि वह दिल्ली से चुनाव लड़तीं तो कम से कम 10 लाख वोट हासिल कर लेतीं।

मेलोनी ने अपनी किताब में इस घटना को भारत और इटली के बीच बढ़ते संबंधों तथा नेताओं के बीच व्यक्तिगत संवाद के महत्व का प्रतीक बताया है।

भारत दौरे की यादें किताब में कीं साझा

जॉर्जिया मेलोनी ने लिखा है कि मार्च 2023 में जब वह भारत आई थीं, तब नई दिल्ली की कई प्रमुख सड़कों पर उनके स्वागत के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए थे। दौरा समाप्त होने के बाद उन्हीं पोस्टरों पर "आने के लिए धन्यवाद" जैसे संदेश दिखाई दिए।

उन्होंने बताया कि यह दृश्य देखकर उनके साथ आए इटली के उप-प्रधानमंत्री एंटोनियो ताजानी भी आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि इतने व्यापक स्वागत को देखकर ऐसा लगता है कि अगर मेलोनी दिल्ली से चुनाव लड़ें तो उन्हें लाखों वोट मिल सकते हैं।

2023 में दो बार आई थीं भारत

मेलोनी ने वर्ष 2023 में दो बार भारत का दौरा किया था। पहली बार वह मार्च में आयोजित रायसीना डायलॉग में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई थीं, जबकि दूसरी बार सितंबर में जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने नई दिल्ली पहुंची थीं।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकातें काफी चर्चा में रहीं। दोनों नेताओं की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे। इंटरनेट पर लोगों ने दोनों नेताओं की दोस्ती को मजाकिया अंदाज में "मेलोडी" नाम भी दिया था।

व्यक्तिगत रिश्ते भी मजबूत करते हैं कूटनीति

अपनी पुस्तक में मेलोनी ने लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति केवल औपचारिक बैठकों, समझौतों और दस्तावेजों तक सीमित नहीं होती। उनका मानना है कि विभिन्न देशों के नेताओं के बीच बनने वाले व्यक्तिगत रिश्ते, आपसी विश्वास और अनौपचारिक बातचीत भी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कई ऐसे अनुभवों का उल्लेख किया है, जिनमें सहज बातचीत ने देशों के बीच विश्वास बढ़ाने में मदद की।

विदेशी नेताओं से जुड़ी रोचक यादें

मेलोनी ने ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति कैस सईद के साथ हुई मुलाकात का भी जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि लंबी बातचीत के बाद दोनों ने समुद्र किनारे कॉफी पी और अनौपचारिक चर्चा की, जो उनके लिए यादगार अनुभव बन गई।

उन्होंने अल्बानिया के प्रधानमंत्री एडी रामा को बेहद सहज और मिलनसार नेता बताया, जो अक्सर समसामयिक विषयों पर संदेशों के जरिए चर्चा करते हैं।

वाइन, किताबें और खास तोहफों का भी जिक्र

किताब में मेलोनी ने सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक के साथ अपनी मित्रता का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि वुसिक को इतालवी वाइन पसंद है और उन्होंने जन्मदिन पर उन्हें नारंगी गुलाबों का गुलदस्ता भेंट किया था।

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा द्वारा उनकी बेटी के लिए दिया गया उपहार भी पुस्तक का हिस्सा है। वहीं पोलैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री माटेउज़ मोराविएकी उन्हें वारसॉ में 'लॉर्ड ऑफ द रिंग्स' थीम वाले कैफे में कॉफी पिलाने ले गए थे, जहां साहित्य और संस्कृति पर लंबी चर्चा हुई।

मेलोनी ने यह भी लिखा कि उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनकी आत्मकथा ‘आई एम जॉर्जिया’ का उज्बेक भाषा में अनुवाद कराकर विशेष प्रति भेंट की थी। उनके अनुसार, ऐसे छोटे-छोटे व्यक्तिगत अनुभव अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक मानवीय और मजबूत बनाते हैं।


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