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ईसीआई का बड़ा फैसला, फॉर्म 6 को पुराने फॉर्मेट में किया बहाल, नॉन-एसआईआर राज्यों में अतिरिक्त घोषणा हटाई गई

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने उन राज्यों में अपने ईसीआईनेट एप्लीकेशन पोर्टल से फॉर्म 6 (वोटर एनरोलमेंट फॉर्म) के साथ जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटाने का फैसला किया है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा हो चुका है। ईसीआईनेट सिस्टम में ये बदलाव 30 सितंबर से लागू हो गए हैं।

ईसीआई का बड़ा फैसला, फॉर्म 6 को पुराने फॉर्मेट में किया बहाल, नॉन-एसआईआर राज्यों में अतिरिक्त घोषणा हटाई गई
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नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने उन राज्यों में अपने ईसीआईनेट एप्लीकेशन पोर्टल से फॉर्म 6 (वोटर एनरोलमेंट फॉर्म) के साथ जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को हटाने का फैसला किया है, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम पूरा हो चुका है। ईसीआईनेट सिस्टम में ये बदलाव 30 सितंबर से लागू हो गए हैं।

हालांकि, यह घोषणा उन राज्यों के लिए लागू रहेगी जहां एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया चल रही है। ईसीआई पोर्टल यह भी दिखाता है कि घोषणा फॉर्म उन 13 राज्यों के लिए उपलब्ध है, जहां वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया चल रही है।

एसआईआर प्रक्रिया के दौरान नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए फॉर्म 6 का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही, जिन लोगों के नाम गिनती के चरण (एन्यूमरेशन फेज) के दौरान हटा दिए गए थे, उन्हें दोबारा लिस्ट में शामिल करने के लिए भी इसकी जरूरत होती है।

पिछले एसआईआर के समय की वोटर लिस्ट के साथ वोटरों की मैपिंग के बारे में फिजिकल फॉर्म में एक अलग घोषणा जोड़ी गई थी।

यह अतिरिक्त घोषणा विवाद का कारण बनी, क्योंकि इसे कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन करके किया गया था और दो चुनाव आयुक्तों, विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू, ने इस पर आपत्ति जताई थी। खबरों के अनुसार, अपनी असहमति जताते हुए दोनों चुनाव आयुक्तों ने कहा था कि यह ईसीआई के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और केवल कानून मंत्रालय को ही कोई बदलाव सुझाने या लागू करने का अधिकार है।

दोनों आयुक्तों का तर्क था कि 'रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के तहत तय फॉर्म में नियमों में संशोधन किए बिना कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।

हालांकि, बाद में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मूल कानूनी फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया था और स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान इसके साथ केवल एक अलग 'एनेक्जर-डी' (अनुबंध-डी) जोड़ा गया था।

इसका मतलब है कि जिन राज्यों में एसआईआर पूरी हो चुकी है, वहां संभावित वोटर स्टैंडर्ड फॉर्म 6 का इस्तेमाल करके आवेदन कर सकते हैं और उन्हें एसआईआर से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जमा करने की जरूरत नहीं होगी।

दरअसल, अलग-अलग राज्यों में एसआईआर के दौरान, नए वोटरों से उनके पिछले चुनावी रिकॉर्ड, माता-पिता या दादा-दादी से जुड़ी जानकारी देने के लिए कहा गया था। इस अतिरिक्त घोषणा में परिवार की पिछली वोटर लिस्ट एंट्रीज के साथ मैपिंग जैसी जानकारी शामिल थी।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब हाल ही में यह बात सामने आई कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने फॉर्म 6 के साथ अतिरिक्त घोषणा को 'अनिवार्य' बनाने पर आपत्ति जताई थी।



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