बेल्जियम से आए करोड़ों के संदिग्ध विदेशी फंड पर ED का बड़ा एक्शन: जैसलमेर में दो ठिकानों पर छापेमारी, दस्तावेजों की जांच जारी
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजस्थान के जैसलमेर जिले में दो जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई बेल्जियम की एक संस्था से मिले लगभग 5.10 करोड़ रुपए के विदेशी चंदे के कथित दुरुपयोग के सिलसिले में की गई, जिसे 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट' (एफसीआरए) के तहत जरूरी रजिस्ट्रेशन के बिना हासिल किया गया था।

जयपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजस्थान के जैसलमेर जिले में दो जगहों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई बेल्जियम की एक संस्था से मिले लगभग 5.10 करोड़ रुपए के विदेशी चंदे के कथित दुरुपयोग के सिलसिले में की गई, जिसे 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट' (एफसीआरए) के तहत जरूरी रजिस्ट्रेशन के बिना हासिल किया गया था।
19 सितंबर को 'फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट' 1999 के तहत तलाशी अभियान चलाया गया। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई कि जैसलमेर के रहने वाले देउ राम को बेल्जियम की संस्थाओं से विदेशी फंड मिल रहा था। आरोप है कि वे इस फंड का इस्तेमाल शिक्षा और समाज कल्याण के कामों की आड़ में समाज के कमजोर वर्गों को प्रभावित करने के लिए कर रहे थे।
ईडी की जांच में पता चला कि देउ राम और उनके सहयोगी ज्ञान चंद को विदेशी रेमिटेंस के तौर पर करीब 5.10 करोड़ रुपए मिले। यह पैसा मुख्य रूप से शैक्षिक सेवाओं, सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियों, और प्रवासी भारतीयों से परिवार के भरण-पोषण या बचत के नाम पर लिया गया था। आरोप है कि इस फंड का एक बड़ा हिस्सा ब्रुसेल्स की गैर-लाभकारी संस्था 'अमर एएसबीएल' से मिला था।
तलाशी के दौरान अधिकारियों को कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड मिले। जांच से पता चला कि 2011 में ब्रुसेल्स में बनी 'अमर एएसबीएल' का संचालन बेल्जियम के नागरिक जोस गोफिनेट और उनके बेटे सालियन गोफिनेट करते हैं।
हालांकि यह संस्था सिर्फ जैसलमेर में काम करती है, लेकिन इसने भारत में न तो कोई ट्रस्ट रजिस्टर कराया और न ही कोई एनजीओ बनाया। आरोप है कि पिछले 14-15 सालो से यह संस्था देउ राम और ज्ञान चंद के जरिए अपनी गतिविधियां चला रही थी।
ईडी का आरोप है कि विदेशी चंदा जरूरी एफसीआरए मंजूरी लिए बिना लिया गया और रेमिटेंस का मकसद गलत बताया गया।
जांचकर्ताओं का यह भी दावा है कि फंड का कुछ हिस्सा निजी खर्चों में इस्तेमाल किया गया, जबकि बाकी रकम का इस्तेमाल बच्चों को शैक्षिक सहायता देने की आड़ में कमजोर समुदायों की सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं को प्रभावित करने के लिए किया गया।
एजेंसी के मुताबिक, पैसा पाने वालों से जुड़े बैंक खातों से करीब 2.60 करोड़ रुपए निकाले गए, जबकि विदेशी फंड मिलने और उसके इस्तेमाल का कोई सही हिसाब-किताब या वित्तीय रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
जांच में यह भी पता चला कि जोस और सालियन गोफिनेट हर साल जैसलमेर आते थे और मदद पाने वाले बच्चों के परिवारों से मिलते थे और बैठकें व धार्मिक सभाएं आयोजित करते थे।
ईडी ने कहा कि विदेशी फंड को कई मकसद वाले कोड के जरिए भेजा गया, जैसे परिवार का भरण-पोषण, शैक्षिक सेवाएं, सांस्कृतिक और मनोरंजक सेवाएं, कमीशन एजेंट सेवाएं और कर्मचारियों का वेतन, जबकि बेल्जियम की संस्था को असल में ऐसी कोई सेवा नहीं दी गई थी।
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि जब बैंकों ने हाल ही में देउ राम और ज्ञान चंद के खातों में विदेशी रेमिटेंस लेना बंद कर दिया, तो जैसलमेर में मौजूद दूसरे सहयोगियों के पर्सनल बैंक खातों के जरिए पैसे भेजने की कोशिश की गई। इस मामले में आगे की जांच चल रही है।


