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चुनाव आयोग का टीएमसी को दो टूक, इस बार बंगाल में बिना डर और हिंसा के होंगे चुनाव

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार चुनाव पूरी तरह हिंसा और भयमुक्त होंगे। वहीं TMC ने ECI पर BJP के साथ मिलीभगत कर मतदाता सूची से 27 लाख वोटरों के नाम काटने का गंभीर आरोप लगाया है।

चुनाव आयोग का टीएमसी को दो टूक, इस बार बंगाल में बिना डर और हिंसा के होंगे चुनाव
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नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनावों को लेकर एक बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश जारी किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने आधिकारिक हैंडल से एक पोस्ट करते हुए, चुनाव आयोग ने राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सीधे तौर पर 'दो टूक' शब्दों में चेतावनी दी है कि इस बार के चुनाव पूरी तरह से पारदर्शी और शांतिपूर्ण होंगे।

आयोग ने अपनी पोस्ट में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का इस्तेमाल करते हुए स्पष्ट किया है कि चुनाव में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या बाहुबल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

चुनाव आयोग ने पोस्ट में क्या कहा था?

अपनी पोस्ट में निर्वाचन आयोग ने लिखा, 'चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक। पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव: भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे।'

सीधे तृणमूल कांग्रेस का नाम क्यों?

पश्चिम बंगाल का चुनावी इतिहास अक्सर राजनीतिक हिंसा, बूथ कैप्चरिंग और मतदाताओं को डराने-धमकाने की घटनाओं से जुड़ा रहा है। विपक्षी दल (खासकर भाजपा, वामदल और कांग्रेस) लगातार सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर चुनावों के दौरान हिंसा और धांधली करने का आरोप लगाते रहे हैं।

आमतौर पर चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों को एक समान निर्देश देता है, लेकिन इस पोस्ट में सीधे तौर पर 'तृणमूल कांग्रेस' का नाम लेना इस बात का संकेत है कि आयोग राज्य में सत्ताधारी पार्टी को लेकर सख्त है।

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं, वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी।

टीएमसी प्रतिनिधिमंडल ने की चुनाव आयुक्त से मुलाकात

चुनाव आयोग का यह कड़ा बयान टीएमसी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा नई दिल्ली के निर्वाचन सदन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के ठीक बाद आया है। इस बैठक में टीएमसी की ओर से पार्टी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन, मेनका गुरुस्वामी, सागरिका घोष और साकेत गोखले मौजूद थे।

मतदाता सूची को लेकर टीएमसी और चुनाव आयोग में टकराव

हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) को लेकर टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच काफी खींचतान देखने को मिली है। टीएमसी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि वह विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के इशारे पर काम कर रहा है और जानबूझकर मतदाता सूची से वोटरों के नाम काट रहा है।

मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए टीएमसी नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी को पता है कि बंगाल में उसे करारी हार का सामना करना पड़ने वाला है। इसी हताशा में, उसने अपना पूरा चुनाव अभियान चुनाव आयोग को आउटसोर्स कर दिया है। यह मिलीभगत अब पूरी तरह से खुलकर सामने आ गई है। नंदीग्राम के कालीचरणपुर के अंचल संयोजक और भाजपा नेता तपन कुमार महापात्र को खुलेआम पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल के साथ देखा गया।

पार्टी ने अपना हमला तेज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने तटस्थता का हर दिखावा छोड़ दिया है। वे अब संवैधानिक अधिकारों की आड़ में खुलेआम भाजपा की लड़ाई लड़ रहे हैं और उनके 'वास्तविक गुर्गों' के रूप में काम कर रहे हैं। लेकिन उनकी ये सभी गंदी साजिशें विफल होना तय है।

लाखों मतदाताओं के नाम कटने का दावा

टीएमसी ने दावा किया है कि राज्य में 60 लाख मतदाताओं को 'अधिनिर्णय' के तहत रखा गया था, जिनमें से 27 लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, SIR प्रक्रिया से पहले पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7,66,37,529 (7.66 करोड़) थी। अब अधिनिर्णय के तहत रखे गए नामों को जोड़े बिना, मतदाताओं की कुल संख्या घटकर 7,04,59,284 (7.04 करोड़) रह गई है। यह स्पष्ट रूप से मतदाता सूची में 61 लाख से अधिक नामों के भारी बदलाव को दर्शाता है।


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