ज्ञानेश कुमार के विरोध के बीच चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, SIR में छूटे लोगों को फिर मौका, फार्म 6 से जुड़ेंगे नाम
एसआईआर पूरा होने के बाद 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव आयोग स्पेशल ड्राइव चलाएगा। छूटे योग्य वोटरों और नए मतदाताओं के नाम फार्म 6 से जोड़े जाएंगे।

नई दिल्ली। देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने एक अहम कदम उठाया है। आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘स्पेशल ड्राइव’ चलाने का निर्देश दिया है, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसका उद्देश्य ऐसे योग्य मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना है, जो पुनरीक्षण के दौरान किसी वजह से छूट गए हैं। इसके साथ ही 18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके नए और पहली बार मतदान करने वाले नागरिकों के नाम भी जोड़े जाएंगे।
29 सितंबर को राज्यों को भेजा गया निर्देश
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को सभी संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश भेजे थे। इसके बाद गुरुवार को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी अधिकारियों को इस अभियान की जानकारी दी गई।
आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों से कहा है कि वे मतदाता सूची को लगातार अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत योग्य लेकिन छूटे हुए लोगों की पहचान करें। इस दौरान SIR से पहले और बाद की मतदाता सूचियों की तुलना भी की जाएगी, ताकि ऐसे मामलों की पहचान हो सके जिनमें नाम हटने का कारण स्पष्ट नहीं है।
फार्म 6 से दोबारा जुड़ सकेगा नाम
SIR पूरा हो चुके राज्यों में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए सामान्य Form 6 का इस्तेमाल किया जा सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि SIR के दौरान फार्म 6 में जोड़ा गया अतिरिक्त घोषणा संबंधी सवाल अब इन राज्यों में लागू नहीं होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त घोषणा SIR की अवधि तक ही संबंधित थी।
अब सामान्य Form 6 के जरिए नए मतदाता और SIR के दौरान छूट गए पात्र लोग नामांकन के लिए आवेदन कर सकेंगे। संबंधित राज्यों में ऑनलाइन Form 6 से SIR से जुड़ा अतिरिक्त प्रश्न हटाए जाने की भी पुष्टि हुई है।
बीएलओ घर जाकर करेंगे मदद
आयोग ने अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं की पहचान करने को कहा है जिनके नाम किसी दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं हुए, जो डुप्लीकेट या मृत मतदाता नहीं हैं, लेकिन SIR के बाद सूची में दिखाई नहीं दे रहे हैं।
ऐसे मामलों में जरूरत पड़ने पर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर जाकर Form 6 भरने में सहायता कर सकते हैं। आयोग ने मतदाता सूची को अपडेट करने में राजनीतिक दलों और उनके बूथ लेवल एजेंटों की भागीदारी का भी उल्लेख किया है।
गोवा के 97 मामलों से बढ़ा तकनीकी प्रक्रिया पर फोकस
गोवा में 97 ऐसे पात्र मतदाताओं का मामला सामने आया था, जिनके नाम तकनीकी वजहों से अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। आयोग के मुताबिक इनमें बड़ी संख्या में मामलों में Form 6 के जरिए आगे की प्रक्रिया शुरू की गई। इस प्रकरण के बाद ECINet प्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े तकनीकी कामकाज की समीक्षा पर भी जोर दिया गया है।
एसआइआर को लेकर आयोग के भीतर भी उठे सवाल
SIR के बीच Form 6 और मतदाता डेटा से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों की रिपोर्ट भी सामने आई थी। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार दोनों आयुक्तों ने पिछले महीनों में कई फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी। आयोग ने दूसरी ओर इन टिप्पणियों को आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा बताते हुए महत्वपूर्ण फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।


