SIR विवाद पर चुनाव आयोग की सफाई: फैसलों में असहमति से इनकार, फर्जी और डुप्लीकेट वोटरों की पहचान का दावा
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं। जानिए फार्म 6, बीएलओ सत्यापन, ईसीआई नेट और बेला एस्टेट मामले पर चुनाव आयोग की सफाई।

फर्जी, डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं की पहचान पर जोर
आयोग के अनुसार SIR के दौरान मृत, डुप्लीकेट, फर्जी और स्थान बदल चुके मतदाताओं की पहचान की जा रही है। साथ ही पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बनाए रखने के लिए प्रक्रिया में दावे और आपत्तियों का अवसर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के फैसले में बिहार में SIR करने की चुनाव आयोग की शक्ति और उससे जुड़े कानूनी सवालों पर विस्तार से विचार किया गया था।
आयोग का कहना है कि SIR के दौरान जिन लोगों को सत्यापन में दिक्कत आती है, उनके लिए भी प्रक्रिया में सुधार किए जा रहे हैं। 26 सितंबर को आयोग ने कहा कि नोटिस पाए लोगों के दस्तावेज BLO घर जाकर एकत्र कर सकते हैं और उन्हें ECINet पर अपलोड कर सकते हैं।
फार्म 6 को लेकर आयोग ने दिया स्पष्टीकरण
नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए फार्म 6 उपलब्ध है। आयोग ने कहा है कि सामान्य फार्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, SIR से जुड़े अतिरिक्त घोषणा प्रावधान को लेकर हाल में विवाद सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से इस व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने की खबरें आई थीं, जबकि आयोग ने अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में फैसलों को सर्वसम्मत बताया है।
आयोग ने ECINet सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है, जिसमें स्वतंत्र IIT/IIIT विशेषज्ञ को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य सिस्टम को चुनाव कानूनों और नियमों के अनुरूप जांचना है।
बीएलओ की भूमिका और गोवा का मामला
SIR प्रक्रिया में BLO की घर-घर जाकर जांच महत्वपूर्ण है। आयोग ने बताया कि छूटे हुए या सत्यापन से जुड़े मामलों में BLO घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। गोवा में तकनीकी समस्या के कारण कुछ मतदाताओं के नाम छूटने का मामला सामने आया था। आयोग के अनुसार ऐसे मामलों में नाम जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
बेला एस्टेट पर भी EC ने रखा पक्ष
दिल्ली के बेला एस्टेट को लेकर राहुल गांधी द्वारा मतदाता नामों में बड़ी कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद आयोग ने कहा कि इलाके की भौतिक और आवासीय स्थिति में बदलाव हुआ है। आयोग के अनुसार इस क्षेत्र में पहले दर्ज कई पते कृषि भूमि से जुड़े थे और वहां मौजूद ढांचों की स्थिति भी बदली है। SIR प्रक्रिया के दौरान दावे और आपत्तियां दर्ज करने का रास्ता खुला हुआ है।


