Top
Begin typing your search above and press return to search.

दिल्ली एसआईआर में फॉर्म-6 पर विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, प्रशांत भूषण बोले- मतदाता असमंजस में

दिल्ली में SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए पुराने मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। प्रशांत भूषण ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए, दिवाली की छुट्टियों के बाद होगी सुनवाई।

दिल्ली एसआईआर में फॉर्म-6 पर विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, प्रशांत भूषण बोले- मतदाता असमंजस में
X

नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान पुराने मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष इस मुद्दे पर तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग उन लोगों से भी फॉर्म-6 भरने को कह रहा है, जिनके नाम पहले मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन SIR प्रक्रिया के दौरान हटा दिए गए।

फॉर्म-6 का इस्तेमाल सामान्य तौर पर पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या नए मतदाता के पंजीकरण के लिए किया जाता है। ऐसे में पुराने मतदाताओं से यह फॉर्म भरवाने को लेकर कानूनी और प्रक्रियागत सवाल खड़े हो रहे हैं।

28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

इससे पहले 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले से मतदाता सूची में शामिल रहे और बाद में हटाए गए नागरिकों को नए मतदाता के तौर पर फॉर्म-6 भरने के लिए बाध्य करना चुनाव आयोग की गलती है। इस मामले में याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी की ओर से प्रशांत भूषण, शेरिल डिसूजा और नेहा राठी ने पक्ष रखा था।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि चुनाव आयोग पुराने मतदाताओं को नए आवेदक के रूप में आवेदन करने के लिए कह रहा है। उनका कहना था कि फॉर्म-6 में खुद को नया मतदाता बताने संबंधी घोषणा गलत साबित होने पर संबंधित व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

प्रशांत भूषण बोले- मतदाता डर और असमंजस में

बुधवार को सुनवाई के लिए मामले का उल्लेख करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा कि मतदाता असमंजस में हैं। उन्हें आशंका है कि यदि वे फॉर्म-6 में खुद को नया मतदाता घोषित करते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है।

इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर विचार कर रहा है और मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। अदालत ने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर उचित प्रक्रिया और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर विचार किया जाएगा।

25 नवंबर तक बढ़ी दावा-आपत्ति की समयसीमा

सुनवाई के दौरान CJI ने यह भी बताया कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा 30 अक्टूबर से बढ़ाकर 25 नवंबर कर दी है। इससे प्रभावित मतदाताओं को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक दस्तावेज जमा कराने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद करने की बात कही। अब अदालत के सामने अहम सवाल यह है कि SIR में हटाए गए पुराने मतदाताओं को सूची में दोबारा शामिल करने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

साथ ही यह भी तय होना है कि क्या ऐसे नागरिकों को नए मतदाता के रूप में आवेदन करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर दिल्ली में SIR प्रक्रिया और प्रभावित मतदाताओं के अधिकारों पर पड़ सकता है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it