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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बार-बार हो रहे रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का लिया स्वतः संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में सामने आए रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया। इनमें दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप और चलती स्लीपर बस में एक नाबालिग के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बार-बार हो रहे रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का लिया स्वतः संज्ञान
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में हाल ही में सामने आए रेप और यौन उत्पीड़न के मामलों का स्वतः संज्ञान लिया। इनमें दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में 17 साल की लड़की के साथ कथित गैंगरेप और चलती स्लीपर बस में एक नाबालिग के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला शामिल है।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में यौन अपराधों की बार-बार हो रही घटनाओं पर चिंता जताई। बेंच ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (पीआईएल) दर्ज करने और सुनवाई के लिए लिस्ट करने का निर्देश दिया।

जस्टिस पारदीवाला की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में यौन अपराधों की हालिया रिपोर्टों के साथ इन घटनाओं को देखने पर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार कानून लागू करने वाली एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि सम्मान के साथ और हिंसा के डर के बिना जीने का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का एक अहम हिस्सा है।

बेंच ने यह भी कहा कि अपर्याप्त रोशनी, निगरानी, ​​गश्त या अन्य ऐसी प्रशासनिक कमियों की वजह से पार्क, सड़कें, बसें, मेट्रो स्टेशन, सबवे और फुटब्रिज को 'हाई-रिस्क ज़ोन' (खतरे वाली जगह) नहीं बनने दिया जा सकता, जिन्हें रोका जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से ठोस कार्रवाई की मांग की और उन लोगों की जवाबदेही तय करने पर ज़ोर दिया जिनकी जिम्मेदारी अपराध रोकना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और कमजोर लोगों की सुरक्षा करना है।

सुप्रीम कोर्ट का यह दखल ऐसे समय में आया है, जब हाल के सप्ताह में दिल्ली और उससे सटे एनसीआर में कई यौन अपराधों की खबरें सामने आई हैं। चिंता बढ़ाने वाली हालिया घटना में दिल्ली में कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में पुलिसकर्मी बनकर आए तीन लोगों ने कथित तौर पर 17 साल की लड़की के साथ गैंगरेप किया।

पुलिस के मुताबिक, लड़की 22 सितंबर को अपने एक पुरुष दोस्त के साथ कालकाजी मंदिर गई थी और बाद में पास के एक पार्क में चली गई। तीनों आरोपियों ने कथित तौर पर उनके पास आकर खुद को पुलिसकर्मी बताया, उन्हें धमकाया और उनके मोबाइल फोन छीन लिए।

पीड़िता ने बाद में पुलिस को बताया कि उनमें से दो लोग उसे पार्क के एक सुनसान हिस्से में ले गए, जहां उसके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि आसिफ नाम के एक आरोपी ने उसे धमकाते हुए बंदूक दिखाई थी।

पीसीआर कॉल मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में मुठभेड़ के दौरान आसिफ को पकड़ लिया गया और उसे गोली लगी। बाकी दो आरोपियों का पता लगाने की कोशिशें जारी थीं।

सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान वाली कार्यवाही में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली इलाके में चलती स्लीपर बस के अंदर 16 साल की लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न का मामला भी शामिल है।

अगस्त में सामने आई इस घटना में उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की एक लड़की शामिल थी, जो नोएडा आई थी और अपना स्टॉप छूटने के बाद एक स्लीपर बस में सवार हो गई थी। आरोप है कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और बाद में उसे दिल्ली के कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पहले ही इस घटना का स्वतः संज्ञान लिया था और दिल्ली व गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर और मैनपुरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को नोटिस जारी कर जांच और पीड़िता को दिए गए मुआवज़ (यदि कोई हो) के बारे में रिपोर्ट मांगी थी।

पुलिस ने ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया और फोरेंसिक जांच के लिए स्लीपर बस को ज़ब्त कर लिया। जांचकर्ताओं ने गाड़ी की आवाजाही और घटनाक्रम का पता लगाने के लिए रास्ते के सीसीटीवी फुटेज भी इकट्ठा किए।



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