दिल्ली-NCR में 10 दिन से बारिश का इंतजार, बादल छा रहे लेकिन बरस क्यों नहीं रहे? जानिए IMD ने क्या बताया
दिल्ली-NCR, यूपी, हरियाणा और राजस्थान में 10 दिन से अच्छी बारिश क्यों नहीं हो रही? जानिए IMD के अनुसार 'ब्रेक इन मॉनसून', अल नीनो और मानसून ट्रफ का पूरा असर तथा कब लौटेगी झमाझम बारिश।

नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में आसमान पर घने बादल छाने के बावजूद बारिश नहीं होने से लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में पिछले करीब 10 दिनों से अच्छी बारिश का इंतजार बना हुआ है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मौजूदा स्थिति की प्रमुख वजह 'ब्रेक इन मॉनसून' है, जिसके कारण मानसूनी गतिविधियां फिलहाल उत्तर-पश्चिम भारत में कमजोर बनी हुई हैं।
बादल हैं, लेकिन बारिश नहीं
हाल के दिनों में सैटेलाइट तस्वीरों में मध्य भारत, उत्तर भारत और पूर्वी तट के ऊपर घने बादल दिखाई दिए, जिससे अच्छी बारिश की उम्मीद जगी। हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में ये बादल बिना अधिक वर्षा किए आगे बढ़ गए। नतीजतन तापमान में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं आई और हवा में नमी बढ़ने से उमस लगातार बनी हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून ट्रफ फिलहाल अपने सामान्य स्थान से हटकर हिमालय की तलहटी और पूर्वी भारत की ओर सक्रिय है। इसी वजह से बारिश का मुख्य क्षेत्र पूर्वोत्तर राज्यों और पूर्वी भारत की तरफ केंद्रित हो गया है।
कुछ राज्यों में बाढ़, कई जगह सूखे जैसे हालात
देश में इस समय मानसून का वितरण असमान बना हुआ है। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और मणिपुर जैसे राज्यों में लगातार भारी बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। वहीं दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस असंतुलित बारिश का असर खेती, जलाशयों और सामान्य जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है।
सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश
जुलाई का आधा महीना बीतने के बावजूद देश के कई हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में औसतन करीब 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसका सबसे अधिक असर खरीफ फसलों की बुवाई और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बादल छाने के बावजूद बारिश नहीं होना किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
क्या अल नीनो का है असर?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार मानसून के कमजोर पड़ने के पीछे अल नीनो का प्रभाव भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। अल नीनो के दौरान समुद्री तापमान में बदलाव के कारण मानसूनी हवाओं की दिशा और तीव्रता प्रभावित होती है। इससे नमी कुछ क्षेत्रों तक सीमित रह जाती है और व्यापक वर्षा नहीं हो पाती।
हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल अल नीनो ही इसकी एकमात्र वजह नहीं है, बल्कि मानसून ट्रफ की स्थिति और अन्य मौसमी प्रणालियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
कब होगी राहत?
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से 20 से 24 जुलाई के बीच मानसून ट्रफ दोबारा सामान्य स्थिति में लौट सकती है। यदि ऐसा होता है तो दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और मध्य भारत के कई हिस्सों में फिर से अच्छी बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
तब तक मौसम विभाग ने लोगों को उमस और गर्मी से सावधान रहने तथा आवश्यक एहतियात बरतने की सलाह दी है।


