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दिल्ली विधानसभा और स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को बम से उड़ाने की धमकी; ईमेल में पीएम और एलजी के भी नाम

दिल्ली विधानसभा और स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। ईमेल के जरिये दी गई धमकी में विधानसभा मेट्रो स्टेशन को भी बम से उड़ाने की बात कही गई है।

दिल्ली विधानसभा और स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को बम से उड़ाने की धमकी; ईमेल में पीएम और एलजी के भी नाम
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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा और स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। ईमेल के जरिये दी गई धमकी में विधानसभा मेट्रो स्टेशन को भी बम से उड़ाने की बात कही गई है।बताया जा रहा है कि मंगलवार को सुबह 7:28 बजे सबसे पहले दिल्ली विधानसभा की ईमेल पर धमकी भरा मेल आया। उसके बाद 7:49 बजे पर स्पीकर विजेंद्र गुप्ता की ईमेल पर धमकी भरा ईमेल मिला।

धमकी वाले ईमेल में दिल्ली के LG तरनजीत संधू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और साथ में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के नामों का भी जिक्र है।बम की धमकी की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस के अधिकारी बम और डॉग स्क्वॉड के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे और जांच-पड़ताल शुरू कर दी।

पुलिस ने विधासनभा परिसर के अंदर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने धमकी वाले ईमेल के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। अब तक की जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है।

एक ही दिन में 300 से अधिक मेल

जुलाई, 2025 में 40 से 50 स्कूलों को बम धमकी वाले ई-मेल मिली थी। ये सभी संदेश झूठे निकले थे। वहीं, पिछले साल सितंबर में एक ही दिन में 300 से अधिक स्कूलों और कई हवाई अड्डों को धमकी भरी ई-मेल मिली थी। इन संदेशों को एक समूह ''टैरो राइज 111'' द्वारा भेजा गया था। इसी महीने शालीमार बाग, द्वारका और साकेत स्थित मैक्स अस्पतालों को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। लेकिन, वहां भी कुछ नहीं मिला। साल 2026 में भी यह सिलसिला जारी रहा। फरवरी और मार्च में करीब 15 से ज्यादा स्कूलों के साथ-साथ ऐतिहासिक धरोहर लाल किला और दिल्ली विधानसभा को भी बम से उड़ाने की धमकी दी गई।

वीपीएन से भेजी गईं ई-मेल

पुलिस जांच में पाया गया कि अधिकतर ई-मेल वीपीएन और एन्क्रिप्टेड सर्वरों के माध्यम से भेजे गए, जिससे प्रेषक की वास्तविक पहचान छुपी रही। साइबर सेल और तकनीकी विशेषज्ञों को जांच में शामिल किया गया। कुछ मामलों में यह भी सामने आया कि धमकी भेजने वाले नाबालिग थे। जुलाई 2025 में एक 12 वर्षीय छात्र द्वारा मजाक में भेजी गई धमकी का मामला उजागर हुआ। उसने स्वीकार किया कि उसका उद्देश्य स्कूल बंद करवाना था।


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