Top
Begin typing your search above and press return to search.

दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर बवाल, रातभर जाम के बाद पुलिस ने हटाई भीड़, धारा-163 लागू

दतिया उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी बदले जाने के बाद समर्थकों ने दतिया-झांसी हाईवे जाम कर दिया। पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर मार्ग खाली कराया।

दतिया उपचुनाव: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर बवाल, रातभर जाम के बाद पुलिस ने हटाई भीड़, धारा-163 लागू
X
दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रत्याशी बदले जाने के बाद जिले में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शुक्रवार शाम दतिया-झांसी हाईवे पर चक्का जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो पूरी रात जारी रहा। शनिवार सुबह प्रशासन ने मार्ग को खाली कराया, जिसके दौरान आंसू गैस के गोले दागे गए और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बन गई।

रातभर हाईवे पर डटे रहे समर्थक

टिकट की घोषणा के बाद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हाईवे पर एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पार्टी नेतृत्व से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की और चेतावनी दी कि उनकी मांगें पूरी न होने पर आंदोलन जारी रहेगा। लंबे समय तक चले जाम के कारण दतिया-झांसी मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

आंसू गैस से हटाई गई भीड़

प्रशासन के अनुसार, समझाइश के बावजूद जब प्रदर्शनकारी नहीं हटे, तब भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का प्रयोग किया गया। अधिकारियों ने लाठीचार्ज से इनकार करते हुए कहा कि केवल न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया। दूसरी ओर, कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग के आरोप लगाए हैं।

पथराव और नुकसान की घटनाएं

कलेक्टर के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कुछ उपद्रवियों ने पथराव किया, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। कुछ वाहनों को भी नुकसान पहुंचा। प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

सुरक्षा के लिए धारा-163 लागू

उपचुनाव के मद्देनजर दतिया अनुभाग में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-163 लागू कर दी गई है। इसके तहत बिना अनुमति सभा, जुलूस और प्रदर्शन पर रोक रहेगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले उपजा यह असंतोष पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि संगठन स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी को किस प्रकार दूर करता है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it