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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ज्ञानेश्वरी यादव ने भारत को दिलाया सिल्वर, 53 किग्रा वेटलिफ्टिंग में 199 किलो वजन उठाकर रचा इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं के 53 किग्रा वर्ग में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता। वहीं जिम्नास्ट प्रोतिष्ठा समांता वॉल्ट फाइनल में पदक से चूक गईं।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: ज्ञानेश्वरी यादव ने भारत को दिलाया सिल्वर, 53 किग्रा वेटलिफ्टिंग में 199 किलो वजन उठाकर रचा इतिहास
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ग्लास्गो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की महिला भारोत्तोलक ज्ञानेश्वरी यादव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 53 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया। ज्ञानेश्वरी ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों स्पर्धाओं में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कुल 199 किलोग्राम (88+111 किग्रा) वजन उठाया और दूसरे स्थान पर रहकर भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया। उनकी इस उपलब्धि से भारतीय दल का पदक अभियान और मजबूत हो गया।

स्नैच में दिखाया दम, रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंचीं

ज्ञानेश्वरी यादव ने स्नैच स्पर्धा की शुरुआत आत्मविश्वास के साथ की। उन्होंने अपने पहले प्रयास के बाद दूसरे प्रयास में 85 किलोग्राम और तीसरे प्रयास में 88 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। उनके तीनों प्रयास सफल रहे, जो उनकी बेहतरीन तकनीक और तैयारी का प्रमाण रहे।

तीसरे प्रयास में उठाया गया 88 किलोग्राम वजन कुछ समय के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड के बराबर माना गया, लेकिन बाद में नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला दिदिह ने 93 किलोग्राम वजन उठाकर नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

क्लीन एंड जर्क में भी शानदार प्रदर्शन

स्नैच के बाद ज्ञानेश्वरी ने क्लीन एंड जर्क में भी शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने 111 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 199 किलोग्राम का स्कोर बनाया। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने रजत पदक हासिल किया और भारत के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि दर्ज की।

भारतीय खेल प्रेमियों ने उनकी इस सफलता पर खुशी जताई और सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार बधाइयां दीं।

जिम्नास्टिक में प्रोतिष्ठा समांता पदक से चूकीं

दूसरी ओर, आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक के महिला वॉल्ट फाइनल में भारत की प्रोतिष्ठा समांता पदक जीतने से चूक गईं। उन्होंने पहले वॉल्ट में 12.700 और दूसरे प्रयास में 12.666 अंक हासिल किए। बोनस अंकों के बाद उनका कुल स्कोर 12.883 रहा।

बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद वह पदक तालिका में जगह नहीं बना सकीं और सातवें स्थान पर रहीं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका प्रदर्शन भारतीय जिम्नास्टिक के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

भारत का दल अब आगामी स्पर्धाओं में भी पदकों की उम्मीद के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है।


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