Top
Begin typing your search above and press return to search.

पेलेट गन विवाद के बीच जवानों के समर्थन में आए सीआरपीएफ प्रमुख, बोले- ‘निडर होकर ड्यूटी करें, जिम्मेदारी मेरी’

पेलेट गन विवाद के बीच सीआरपीएफ प्रमुख जी.पी. सिंह ने जवानों का समर्थन करते हुए कहा कि वे निडर होकर ड्यूटी करें, जिम्मेदारी उनकी होगी। आंतरिक समीक्षा में RAF द्वारा एसओपी पालन का दावा किया गया।

पेलेट गन विवाद के बीच जवानों के समर्थन में आए सीआरपीएफ प्रमुख, बोले- ‘निडर होकर ड्यूटी करें, जिम्मेदारी मेरी’
X
नई दिल्ली। 20 जुलाई को नीट पेपर लीक विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने अपने जवानों का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान यदि जवान जनता, संगठन और राष्ट्रहित में ईमानदारी से निर्णय लेते हैं, तो उनकी जिम्मेदारी वह स्वयं लेंगे। उन्होंने सभी कर्मियों से बिना किसी भय के अपने कर्तव्यों का निर्वहन जारी रखने की अपील की।

सीआरपीएफ के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित अलंकरण समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए महानिदेशक ने कहा कि चाहे जवान ऑपरेशनल बटालियन में तैनात हों या कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली इकाइयों में, यदि उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन नियमों के तहत और सद्भावना के साथ किया है, तो उन्हें किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

‘कर्तव्य निभाने से पीछे न हटें’

जी.पी. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बल के प्रत्येक सदस्य को पूरी निष्ठा और आत्मविश्वास के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां भी जवाबदेही तय करने की जरूरत होगी, वहां वह स्वयं महानिदेशक के रूप में जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान को जवानों का मनोबल बढ़ाने वाला संदेश माना जा रहा है।

हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजधानी में हुए छात्र आंदोलन के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की भूमिका को लेकर कई सवाल उठे थे। विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से जवाब मांगा था।

आंतरिक समीक्षा में SOP पालन का दावा

सूत्रों के अनुसार, सीआरपीएफ द्वारा 20 जुलाई की घटना की आंतरिक समीक्षा पूरी कर ली गई है। समीक्षा में यह निष्कर्ष सामने आया कि RAF के जवानों ने कार्रवाई के दौरान निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और सभी स्थापित प्रोटोकॉल का पालन किया।

बताया गया कि बल प्रयोग की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से अपनाई गई। पहले प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी गई, उसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। जब स्थिति नियंत्रण में नहीं आई और कथित रूप से उपद्रवी तत्व सक्रिय रहे, तब लाठीचार्ज और अंत में अधिकृत बल के रूप में पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया।

कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा

सूत्रों का कहना है कि यदि भविष्य में RAF के किसी जवान के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठती है, तो कानून के तहत अभियोजन की अनुमति का प्रश्न भी सामने आएगा। ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होगी। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह साबित होता है कि बल प्रयोग अधिकृत नियमों और ड्यूटी के दायरे में किया गया था, तो संबंधित जवानों को कानूनी संरक्षण मिल सकता है।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बहस अभी भी जारी है। विपक्ष लगातार स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी।

जांच और राजनीतिक बहस जारी

पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर संसद के भीतर और बाहर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं ने इस मामले में जवाबदेही तय करने और विस्तृत जांच की मांग की है। वहीं सुरक्षा एजेंसियां अपने आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बता रही हैं।

ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है। साथ ही, जांच एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it