एंटी पेपर लीक बिल पर CJP का हमला, अभिजीत दीपके बोले- ‘कानून नहीं, नीयत बदलने की जरूरत’; पीएम मोदी पर भी साधा निशाना
लोकसभा से एंटी पेपर लीक बिल पारित होने के बाद CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की।

मुंबई। लोकसभा से लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने के बाद देश में पेपर लीक, छात्र आंदोलन और नई परीक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल कानून बना देने से परीक्षा प्रणाली में सुधार नहीं होगा। उनके मुताबिक, जब तक कानून लागू करने वाली एजेंसियों की नीयत और कार्यप्रणाली नहीं बदलती, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी।
‘इन्फ्लुएंसर बनने पर विचार करें’ टिप्पणी से बढ़ी सियासत
महाराष्ट्र स्थित अपने गृह नगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री युवाओं से संवाद करने के लिए लगातार वीडियो बना रहे हैं, तो उन्हें एक प्रभावशाली इन्फ्लुएंसर की भूमिका अधिक उपयुक्त लगती है।
उन्होंने कहा, “अगर कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर युवाओं से संवाद करने में इतना सक्रिय है, तो उसे प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर भी उसी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। केवल वीडियो संदेशों से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।” दीपके की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
कानून से ज्यादा जरूरी प्रभावी क्रियान्वयन
दीपके ने लोकसभा से पारित एंटी पेपर लीक बिल की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में पहले भी कई सख्त कानून बनाए गए हैं, लेकिन उनका अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि किसी भी कानून की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में सरकार ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही थी, लेकिन यदि जांच और अभियोजन प्रक्रिया समय पर आगे नहीं बढ़ती तो केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त साबित नहीं होंगे। उनके अनुसार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेही और निष्पक्ष जांच सबसे महत्वपूर्ण है।
छात्र आंदोलन और समझौते का किया जिक्र
सीजेपी संस्थापक ने छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन ने शुरुआत से ही प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और किसी भी प्रकार की प्रताड़ना रोकने की मांग उठाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर छात्रों और उनके परिवारों में अब भी असंतोष बना हुआ है।
दीपके ने यह भी कहा कि यदि सरकार आंदोलन के दौरान दिए गए आश्वासनों को पूरी तरह लागू नहीं करती है, तो संगठन आगे की रणनीति पर विचार करेगा। हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
किसानों और युवाओं की एकजुटता पर जोर
उन्होंने हाल के दिनों में किसान संगठनों के नेताओं से हुई मुलाकातों का भी उल्लेख किया और कहा कि शिक्षा, रोजगार और कृषि जैसे मुद्दों पर युवाओं और किसानों के बीच संवाद बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, विभिन्न सामाजिक समूहों को साझा मुद्दों पर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है।
वोट की ताकत का किया जिक्र
दीपके ने युवाओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि किसी भी लोकतंत्र में जनता का सबसे बड़ा अधिकार मतदान है। उन्होंने कहा कि यदि छात्र और युवा अपने मुद्दों को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें चुनाव के समय अपने मताधिकार का जिम्मेदारी से उपयोग करना चाहिए।
इस बीच, एंटी पेपर लीक विधेयक लोकसभा से पारित होने के बाद अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा। सरकार का कहना है कि नया कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर सख्त अंकुश लगाएगा, जबकि विपक्ष और कुछ छात्र संगठनों का मानना है कि कानून के साथ-साथ उसके निष्पक्ष क्रियान्वयन पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।


