आज आखिरी दिन, सीजेपी का चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अल्टीमेटम; 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
एसआइआर विवाद के बीच सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है। मांग पूरी नहीं होने पर 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

नई दिल्ली। चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि अगर शनिवार तक चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर, यानी गांधी जयंती से देशभर में प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
सीजेपी की ओर से जंतर-मंतर पर जुट रहे युवाओं का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किया गया। पार्टी ने आंदोलनकारियों से 2 अक्टूबर को दिल्ली में जुटने की अपील की है। इससे पहले संगठन ने मुख्चुय नाव आयुक्त को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन बाद में आंदोलन की तारीख बदलकर गांधी जयंती कर दी गई।
एसआईआर को लेकर क्या है विवाद?
विवाद की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कई फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। इन आपत्तियों का संबंध मतदाता नाम जोड़ने, नाम हटाने, बहाली, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों से था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों को उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बीच कहा है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं।
सीजेपी की प्रमुख मांगें क्या हैं?
सीजेपी संयोजक अभिजीत दीपके और सह-संयोजकों सौरव दास तथा आशुतोष रांका ने ‘इलेक्शन कमीशन ठीक करो’ अभियान के तहत एसआईआर प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि SIR के कारण 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर हुए हैं। यह संख्या और इसके कारणों को लेकर चुनाव आयोग तथा आलोचकों के बीच मतभेद हैं।
सीजेपी की मांग है कि आयोग हटाए गए प्रत्येक नाम के संबंध में प्रक्रिया की वैधता, पारदर्शिता और समीक्षा की व्यवस्था स्पष्ट करे। इसके अलावा संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर के दौरान लिए गए फैसलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
पार्टी ने नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाने, सत्यापन पूरा होने तक जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने और संबंधित रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट या स्वतंत्र न्यायिक समिति को सौंपने की भी मांग रखी है।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया से बढ़ी हलचल
एसआईआर विवाद पर विपक्षी दलों ने भी चुनाव आयोग से सवाल पूछे हैं। कांग्रेस ने कई शहरों में प्रदर्शन किया। वहीं, कुछ विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग भी की है। दूसरी ओर चुनाव आयोग अपने फैसलों को लेकर अपनी प्रक्रिया और संवैधानिक भूमिका पर कायम है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि सीजेपी के अल्टीमेटम के बाद क्या कदम उठाया जाता है और 2 अक्टूबर को प्रस्तावित देशव्यापी आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ता है।


