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दक्षिणी चीन में ‘मेसाक’ का कहर, बाढ़ और बांध टूटने से 39 लोगों की मौत, राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी

दक्षिणी चीन में ट्रॉपिकल स्टॉर्म ‘मेसाक’ से आई बाढ़ और बांध टूटने की घटनाओं में 39 लोगों की मौत हो गई। गुआंग्शी क्षेत्र में राहत और बचाव कार्य जारी है।

दक्षिणी चीन में ‘मेसाक’ का कहर, बाढ़ और बांध टूटने से 39 लोगों की मौत, राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी
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बीजिंग। दक्षिणी चीन में ट्रॉपिकल स्टॉर्म ‘मेसाक’ के प्रभाव से आई भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचा दी है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक कम से कम 39 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अनेक लोग घायल हुए हैं और हजारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। भारी वर्षा के कारण नदियां उफान पर हैं और कई इलाकों में जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

बांध टूटने से बढ़ा नुकसान

सबसे गंभीर हादसा गुआंग्शी क्षेत्र के नाननिंग शहर में हुआ, जहां एक बांध टूट जाने से अचानक आई बाढ़ में 26 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, पानी के तेज बहाव ने कई घरों और सड़कों को नुकसान पहुंचाया, जिससे बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो गया।

क्या है ट्रॉपिकल स्टॉर्म ‘मेसाक’?

‘मेसाक’ पश्चिमी प्रशांत महासागर में बनने वाला एक उष्णकटिबंधीय तूफान है। जब किसी चक्रवाती प्रणाली में हवाओं की गति 63 से 118 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच होती है, तो उसे ट्रॉपिकल स्टॉर्म की श्रेणी में रखा जाता है। इससे अधिक गति होने पर वही प्रणाली टाइफून कहलाती है।

इस वर्ष मेसाक दक्षिण चीन सागर में विकसित हुआ और हैनान द्वीप से गुजरते हुए दक्षिणी चीन के तटीय इलाकों तक पहुंचा। इसके साथ आई मूसलाधार बारिश ने बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया।

नामकरण की भी है विशेष प्रक्रिया

‘मेसाक’ नाम माइक्रोनेशिया की ओर से विश्व मौसम विज्ञान संगठन और टाइफून समिति को सुझाया गया था। प्रशांत क्षेत्र में आने वाले तूफानों के नाम पहले से तय सूची के अनुसार क्रमवार रखे जाते हैं।

राहत कार्य जारी

आपदा के बाद स्थानीय प्रशासन, सेना और राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रही हैं। कई गांवों और कस्बों में अब भी जलभराव है, जिसके कारण राहत सामग्री पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते जलवायु पैटर्न के कारण ऐसे तीव्र मौसमीय घटनाक्रमों की आवृत्ति बढ़ रही है, जिससे आपदा प्रबंधन तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।


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