बिहार में पेपर लीक का बड़ा चेहरा डॉ. मनीष गिरफ्तार , प्रश्नपत्र के सीलबंद बक्से को खोलने और दोबारा सील करने का है एक्सपर्ट
बिहार BPSC TRE पेपर लीक मामले में EOU ने डॉ. मनीष कुमार को गिरफ्तार किया। उस पर सीलबंद प्रश्नपत्र खोलने, 30 अभ्यर्थियों से ₹1.20 करोड़ लेने और पेपर लीक गिरोह से जुड़े होने का आरोप है।

पटना। बिहार में पेपर लीक माफिया के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने BPSC शिक्षक भर्ती (TRE) पेपर लीक मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए डॉ. मनीष कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, डॉ. मनीष पर प्रश्नपत्रों के सीलबंद बक्सों को बिना नुकसान पहुंचाए खोलने और दोबारा उसी तरह सील करने में विशेषज्ञ होने का आरोप है। माना जा रहा है कि वह पेपर लीक नेटवर्क का एक अहम सदस्य था और लंबे समय से इस गिरोह के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था।
30 अभ्यर्थियों से ₹1.20 करोड़ लेने का आरोप
EOU के मुताबिक, डॉ. मनीष और उसके सहयोगियों पर BPSC TRE परीक्षा से पहले करीब 30 अभ्यर्थियों से लगभग ₹1.20 करोड़ वसूलने का आरोप है। जांच में सामने आया है कि परीक्षा से पहले उम्मीदवारों को कथित रूप से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए थे। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
सरकारी डॉक्टर की नौकरी छोड़कर कर रहा था तैयारी
जांच अधिकारियों के अनुसार, डॉ. मनीष पहले सरकारी चिकित्सक था, लेकिन उसने नौकरी छोड़ दी थी और पटना में NEET-PG की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान वह कथित रूप से पेपर लीक गिरोह के संपर्क में आया। EOU का दावा है कि वह डॉ. शिव और डॉ. शुभम के साथ मिलकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।
संजीव मुखिया के बेटे से करीबी संबंध
जांच में यह भी सामने आया है कि डॉ. मनीष की दोस्ती कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया के बेटे डॉ. शिव से थी। 14 मार्च 2024 को पटना के कोहिनूर होटल में पुलिस ने छापेमारी की थी, जहां परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जा रहे थे। हालांकि उस समय डॉ. मनीष मौके से फरार होने में सफल रहा था।
बाद में होटल के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और पीएमसीएच तथा एनएमसीएच के छात्रों के डेटा की जांच के आधार पर EOU उसकी पहचान तक पहुंची। पूछताछ और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया।
296 गिरफ्तारियां, जांच जारी
BPSC TRE 2024 पेपर लीक मामले में अब तक 296 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। EOU का मानना है कि इस गिरफ्तारी से पूरे गिरोह के संचालन और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। एजेंसी का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है।


