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बांके बिहारी मंदिर में दान को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- हर एक पाई सीधे मंदिर की तिजोरी में जाए

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में मिलने वाले दान को लेकर अहम निर्देश जारी करते हुए कहा कि मंदिर को मिलने वाली हर एक पाई केवल निर्धारित दानपात्रों या ऑनलाइन माध्यम से सीधे मंदिर की तिजोरी में जमा होनी चाहिए।

बांके बिहारी मंदिर में दान को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- हर एक पाई सीधे मंदिर की तिजोरी में जाए
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में मिलने वाले दान को लेकर अहम निर्देश जारी करते हुए कहा कि मंदिर को मिलने वाली हर एक पाई केवल निर्धारित दानपात्रों या ऑनलाइन माध्यम से सीधे मंदिर की तिजोरी में जमा होनी चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन भी शामिल थे, ने कहा कि दान की व्यवस्था में सेवायतों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न करना गंभीरता से लिया जाएगा।

अदालत ने मंदिर की प्रबंधन समिति को दान प्राप्त करने के लिए पूरी तरह पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि दान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मंदिर के धन से संपत्ति खरीदने से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को लेन-देन पूरा होने से पहले अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

यह आदेश बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े व्यापक विवाद की सुनवाई के दौरान दिया गया। मामला मंदिर के धन के प्रबंधन और उसके संचालन की निगरानी के लिए समिति के गठन से संबंधित है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश, 2025 के जरिए मंदिर के प्रबंधन को वैधानिक ढांचे में लाने का फैसला किया था। इससे पहले मंदिर का संचालन 1939 की प्रबंधन योजना के तहत होता था, जिसमें दर्शन व्यवस्था, धार्मिक परंपराएं और मंदिर की वित्तीय व्यवस्था शामिल थीं।

अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। समिति को श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शौचालय, आश्रय, भीड़ प्रबंधन और मंदिर परिसर के विकास जैसे कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।



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