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बांग्लादेश में फिर भड़की हिंसा, 529 कपड़ा कारखाने बंद; 10 लाख मजदूर सड़कों पर, 30 हजार टका वेतन की मांग

बांग्लादेश में कम मजदूरी के खिलाफ कपड़ा मजदूरों का प्रदर्शन हिंसक हो गया है। ढाका समेत कई औद्योगिक क्षेत्रों में 529 कारखाने प्रभावित हुए हैं और करीब 10 लाख श्रमिकों पर असर पड़ा है।

बांग्लादेश में फिर भड़की हिंसा, 529 कपड़ा कारखाने बंद; 10 लाख मजदूर सड़कों पर, 30 हजार टका वेतन की मांग
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ढाका। बांग्लादेश में करीब 28 महीने बाद एक बार फिर सड़कों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इस बार आंदोलन की वजह सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि कपड़ा मजदूरों की कम मजदूरी है। न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हजारों श्रमिक ढाका समेत कई औद्योगिक इलाकों में प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान सड़क जाम, पत्थरबाजी, आगजनी और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं सामने आई हैं। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब 529 कपड़ा कारखाने प्रभावित हुए हैं और लगभग 10 लाख श्रमिकों पर इसका असर पड़ा है।

ढाका से गाजीपुर तक सड़कों पर उतरे मजदूर

मजदूरों का प्रदर्शन 31 अक्टूबर से शुरू हुआ। मीरपुर, आशुलिया, सावर और गाजीपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों ने सड़कें जाम कर दीं और फैक्ट्रियों में काम बंद करा दिया। कुछ स्थानों पर पुलिस बॉक्स और वाहनों में आग लगाने तथा तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुईं।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। संवेदनशील इलाकों में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के जवान भी तैनात किए गए हैं।

सोमवार को फैक्ट्रियों में कामकाज दोबारा शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन मजदूर फिर सड़कों पर उतर आए। मीरपुर-10 के सेनपारा परबता इलाके में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। मीरपुर-2 में भी मजदूरों को सड़क से हटाया गया।

12 हजार टका में परिवार चलाना मुश्किल

कपड़ा मजदूरों की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम मासिक वेतन 30 हजार टका करने की है। फिलहाल उन्हें करीब 12 हजार टका वेतन मिल रहा है। श्रमिकों का कहना है कि भोजन, मकान का किराया, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती कीमतों के कारण मौजूदा वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

मजदूरों का आरोप है कि कम मजदूरी के बावजूद उनसे लंबे समय तक काम कराया जाता है। सरकार ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए वेतन बोर्ड गठित किया है, लेकिन श्रमिक तत्काल वेतन वृद्धि चाहते हैं।

शेख हसीना समर्थकों पर हिंसा भड़काने का आरोप

बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया है कि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग से जुड़े कुछ उद्योगपति और पूर्व जनप्रतिनिधि औद्योगिक अशांति को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका दावा है कि कुछ फैक्ट्री मालिकों ने जानबूझकर कारखाने बंद किए और मजदूरों को उकसाकर हिंसा कराई। सरकार ने इन आरोपों के समर्थन में वीडियो और ऑडियो सबूत होने की बात कही है।

अर्थव्यवस्था की रीढ़ है कपड़ा उद्योग

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में रेडीमेड गारमेंट उद्योग की बड़ी भूमिका है। वर्ष 2024-25 में इस क्षेत्र से करीब 39.35 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो देश के कुल निर्यात का 81 प्रतिशत से अधिक था। चीन के बाद बांग्लादेश दुनिया का दूसरा बड़ा रेडीमेड कपड़ा निर्यातक है।

ऐसे में फैक्ट्रियों का बंद होना और मजदूरों का लगातार प्रदर्शन देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।


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