यूपी के आजमगढ़ में चार हत्याओं के बाद एनकाउंटर, 7 घंटे तक चला ऑपरेशन; स्टन ग्रेनेड से तोड़ा दरवाजा, दो बच्चे सुरक्षित
आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के बाद बच्चों को कमरे में बंद करने वाले आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। सात घंटे तक चला ऑपरेशन।

आजमगढ़। यूपी के आजमगढ़ के अहरौला क्षेत्र में पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के बाद बच्चों को कमरे में बंधक बनाने वाले अरविंद कुमार की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, करीब सात घंटे तक आरोपी को आत्मसमर्पण के लिए समझाया गया। अंदर से गोली चलने के बाद पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल कर कमरे में प्रवेश किया। इस दौरान आरोपी की गोली से घायल उसके नौ वर्षीय बेटे की भी इलाज के दौरान मौत हो गई।
पूजा के दौरान विवाद से शुरू हुआ खूनी घटनाक्रम
पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विवाद हुआ। बताया गया कि घर में अरविंद के भाई की आत्मा की शांति के लिए पूजा चल रही थी। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और अरविंद कुमार ने कथित तौर पर अपनी पत्नी बबिता सिंह पर गोली चला दी।
पुलिस के अनुसार, इसके बाद उसने अनुष्ठान में शामिल दो पुजारियों अखिलेश मिश्रा और महेंद्र पाठक की भी गोली मारकर हत्या कर दी। तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने तीन बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।
सात घंटे तक पुलिस करती रही आत्मसमर्पण की अपील
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने इलाके को घेर लिया। एसपी डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह समेत पुलिस टीम ने आरोपी से बातचीत कर उसे आत्मसमर्पण के लिए मनाने की कोशिश की। पुलिस और परिजनों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी बच्चों को भी नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहा था। ऐसे में कई घंटे तक बातचीत के जरिए स्थिति को संभालने का प्रयास किया गया। इसी बीच कमरे के अंदर से अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद पुलिस ने तत्काल ऑपरेशन शुरू किया।
स्टन ग्रेनेड और टियर गैस के बाद तोड़ा गया दरवाजा
पुलिस के मुताबिक, बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए टीम ने कमरे में प्रवेश करने के लिए स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया। इसके बाद दरवाजा तोड़कर पुलिसकर्मी अंदर दाखिल हुए।
पुलिस का दावा है कि अंदर पहुंचते ही अरविंद ने टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। उसने करीब चार-पांच राउंड गोलियां चलाईं। जवाब में पुलिस टीम ने नियंत्रित फायरिंग की, जिसमें अरविंद घायल हो गया।
बेटे की भी इलाज के दौरान मौत
कमरे के अंदर आरोपी का नौ वर्षीय बेटा शौर्य सिंह गोली लगने से गंभीर रूप से घायल मिला। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं घायल अरविंद को भी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने कमरे से 10 वर्षीय बच्ची परी और छह माह की बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बड़ी बच्ची को मामूली खरोंच आने की बात सामने आई है।
फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
पुलिस के मुताबिक, सभी मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए गए हैं। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा और आजमगढ़ परिक्षेत्र के डीआईजी सुनील कुमार सिंह भी घटनास्थल पर मौजूद रहे और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
परिजनों ने दावा किया कि अरविंद की मानसिक स्थिति ठीक नहीं रहती थी और घर में भूत-प्रेत की बाधा दूर करने के लिए पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस सामग्री में नहीं है। पुलिस की जांच में घटना की परिस्थितियों और फायरिंग के पूरे क्रम को भी स्पष्ट किया जा रहा है।


