दिल्ली आबकारी नीति केस में बरी होने के बाद केजरीवाल और सिसोदिया ने जमा किए 50 हजार रुपये के जमानत बांड
दिल्ली आबकारी नीति मामले में बरी होने के बाद अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने अदालत में 50 हजार रुपये के जमानत बांड जमा किए। राउज एवेन्यू कोर्ट ने 23 आरोपियों को किया था बरी।

नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अदालत में अपने जमानत बांड जमा कर दिए हैं। दोनों नेताओं ने अदालत में 50,000 रुपये के जमानत बांड जमा किए।
दरअसल, किसी भी आपराधिक मामले में आरोपी के बरी या दोषमुक्त होने के बाद भी अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च अदालत में अपील की संभावना बनी रहती है। ऐसे में कानून के तहत आरोपी से जमानत बांड जमा करवाया जाता है, ताकि अपील दायर होने की स्थिति में उसकी अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 27 फरवरी को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कुल 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि प्रस्तुत किए गए साक्ष्य आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसी फैसले के बाद केजरीवाल और सिसोदिया सहित अन्य आरोपियों को राहत मिली थी।
सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे इस मामले में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति के निर्माण और उसके कार्यान्वयन में अनियमितताएं हुई थीं। हालांकि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को सिद्ध नहीं माना और सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
कानूनी प्रक्रिया के तहत बरी होने के बाद भी अदालत में जमानत बांड जमा करना आवश्यक होता है, ताकि यदि भविष्य में इस फैसले को चुनौती दी जाती है तो संबंधित व्यक्ति को अदालत में उपस्थित होने के लिए बाध्य किया जा सके। इस बीच राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर चर्चाएं जारी हैं और विभिन्न दलों की ओर से इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।


