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अमेरिका-ईरान वार्ता की तैयारी तेज, स्विट्जरलैंड में परमाणु समझौते पर हो सकती है बड़ी बातचीत

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में संभावित परमाणु वार्ता की तैयारी तेज हो गई है। स्टीव विटकॉफ रवाना हो चुके हैं, जबकि 14 सूत्रीय समझौते के बाद क्षेत्रीय शांति की उम्मीदें बढ़ी हैं।

अमेरिका-ईरान वार्ता की तैयारी तेज, स्विट्जरलैंड में परमाणु समझौते पर हो सकती है बड़ी बातचीत
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वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नरमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद अब स्विट्जरलैंड में संभावित परमाणु समझौते को लेकर नई वार्ता की तैयारी तेज हो गई है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हो चुके हैं, जबकि ईरान की ओर से भी उच्चस्तरीय कूटनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता सफल रहती है तो न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों में सुधार होगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा।

स्विट्जरलैंड में हो सकती है अहम बैठक

सूत्रों के अनुसार अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का पहला चरण स्विट्जरलैंड में आयोजित किया जा सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर भी पहले ही स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। प्रारंभिक योजना के अनुसार यह बातचीत शुक्रवार से शुरू होनी थी, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा हालात के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था।

अब लेबनान में संघर्ष विराम लागू होने के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावनाएं फिर मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। हालांकि वार्ता की नई तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

लेबनान की स्थिति पर टिकी निगाहें

ईरान ने स्पष्ट किया है कि लेबनान की स्थिति उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी वार्ता में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उनका दौरा क्षेत्रीय हालात पर निर्भर करेगा।

कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, ईरान का मानना है कि जब तक लेबनान में संघर्ष विराम पूरी तरह स्थिर नहीं हो जाता, तब तक किसी बड़े समझौते की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल होगा। इसी वजह से लेबनान के हालात अमेरिका-ईरान वार्ता के भविष्य से सीधे जुड़े हुए माने जा रहे हैं।

संघर्ष विराम में कई देशों की भूमिका

लेबनान में संघर्ष विराम लागू कराने के प्रयासों में अमेरिका, कतर और अन्य मध्यस्थ देशों ने अहम भूमिका निभाई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने भी तनाव कम करने की दिशा में सहयोग किया है। क्षेत्र में शांति बहाली की यह कोशिश अब व्यापक कूटनीतिक वार्ता का आधार बनती दिखाई दे रही है।

14 सूत्रीय समझौते के प्रमुख बिंदु

दोनों देशों के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। इसमें क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों को सीमित करने, 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में काम करने और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा अमेरिका द्वारा कुछ प्रतिबंधों में चरणबद्ध ढील देने और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने की बात भी शामिल है। साथ ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तकनीकी स्तर पर वार्ता जारी रखने पर सहमति बनी है।

आर्थिक सहयोग पर भी फोकस

समझौते में ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने, तेल निर्यात से जुड़ी कुछ बाधाओं को कम करने और आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दे भी शामिल बताए जा रहे हैं। कतर ने भी दोनों देशों के बीच संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अपना समर्थन दोहराया है।

अब वैश्विक समुदाय की नजर स्विट्जरलैंड में होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी है, क्योंकि इससे पश्चिम एशिया में शांति, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर व्यापक असर पड़ सकता है।


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