अखिलेश के ‘चवन्नी’ वाले बयान पर भड़के जयंत चौधरी, बोले- जाट समाज को निशाना बनाना पतन की राह
अखिलेश यादव के ‘चवन्नी को रुपया’ बयान पर जयंत चौधरी ने पलटवार किया। जाट समाज को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए इसे राजनीतिक पतन की राह बताया।

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘चवन्नी को रुपया बना दिया’ वाले बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में किसी समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है और ऐसा राजनीतिक अहंकार अंततः पतन का कारण बनता है।
जयंत चौधरी ने जाट समाज का मुद्दा उठाया
जयंत चौधरी ने कहा कि अगर राजनीतिक विरोध में कुछ तीखे शब्द कहने ही थे तो उनका नाम लेकर टिप्पणी की जा सकती थी। उन्होंने जाट समाज को लेकर की गई कथित टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी पूरे समुदाय को निशाना बनाना सही राजनीतिक व्यवहार नहीं है।
आरएलडी प्रमुख ने अपने पोस्ट में कहा कि सियासी लड़ाई में उनके खिलाफ बोलना होता तो वह इसे व्यक्तिगत तौर पर लेते, लेकिन जाट समाज को निशाना बनाने वाली बयानबाजी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने राजनीतिक अहंकार का असर करीब से देखा है और ऐसा आचरण किसी भी नेता के लिए पतन का रास्ता बन सकता है।
राजभर ने भी अखिलेश पर साधा निशाना
इस विवाद में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी जयंत चौधरी के समर्थन में दिखाई दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव की टिप्पणी से जाट समुदाय का अपमान हुआ है। राजभर ने कहा कि जाट समाज का उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने अखिलेश यादव को अपने राजनीतिक इतिहास को समझने की सलाह देते हुए कहा कि ऐसी बयानबाजी के राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।
क्या है ‘चवन्नी’ बयान का पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव की एक टिप्पणी से हुई। उन्होंने बिना नाम लिए कहा था कि “हम लोगों ने चवन्नी को रुपया बना दिया, फिर भी छोड़कर चले गए।” इसे जयंत चौधरी के वर्ष 2022 के उस बयान से जोड़कर देखा जा रहा है, जब सपा और आरएलडी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव साथ लड़ रहे थे।
उस समय भाजपा के साथ जाने की अटकलों पर जयंत चौधरी ने कहा था कि वह कोई ‘चवन्नी’ नहीं हैं जो पलट जाएं। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले एरएलडी ने सपा से अलग होकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का साथ दिया। बाद में जयंत चौधरी केंद्र सरकार में मंत्री बने।
यूपी चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं का महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में इस बयानबाजी को आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बसपा प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश यादव की टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे जाट समाज और चौधरी चरण सिंह की विरासत का अपमान बताया है।


