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अकाली दल का बड़ा ऐलान, महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का करेगा समर्थन; भाजपा से गठबंधन के संकेत तेज

अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन बिल के समर्थन का ऐलान किया है। सुखबीर बादल की पीएम मोदी से मुलाकात के बाद भाजपा-अकाली गठबंधन की अटकलें तेज हो गई हैं।

अकाली दल का बड़ा ऐलान, महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का करेगा समर्थन; भाजपा से गठबंधन के संकेत तेज
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नई दिल्ली। पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित नजदीकी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों का समर्थन करने का ऐलान किया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं की बैठक में क्या बातचीत हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इसके बाद पंजाब के राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर अकाली दल का समर्थन

अकाली दल की ओर से महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित विधेयकों के समर्थन का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकार इसे केंद्र की भाजपा सरकार के साथ पार्टी के बदलते संबंधों के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, अकाली दल और भाजपा दोनों ने अभी तक आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर किसी गठबंधन की औपचारिक घोषणा नहीं की है।

सुखबीर बादल और प्रधानमंत्री मोदी की हालिया मुलाकात के बाद गठबंधन की संभावनाओं को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज हुई है क्योंकि दोनों दल लंबे समय तक पंजाब में एक साथ चुनाव लड़ते रहे हैं।

2020 में टूट गया था भाजपा-अकाली दल गठबंधन

भाजपा और अकाली दल के बीच करीब दो दशक से अधिक समय तक राजनीतिक गठबंधन रहा। हालांकि, कृषि कानूनों को लेकर मतभेद के बाद 2020 में अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़े।

अब पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबले के बीच भाजपा और अकाली दल के दोबारा करीब आने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। दोनों पार्टियों के सामने राज्य में अपने राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने की चुनौती है।

दोनों दलों की अलग-अलग ताकत

लोकसभा में अकाली दल के पास फिलहाल सीमित प्रतिनिधित्व है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की संख्या भले ही बड़ी न हो, लेकिन पंजाब में उसका पारंपरिक जनाधार महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों और सिख मतदाताओं के बीच अकाली दल की राजनीतिक पकड़ रही है।

दूसरी ओर भाजपा का प्रभाव पंजाब के शहरी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मजबूत माना जाता है। ऐसे में दोनों दलों का संभावित गठबंधन ग्रामीण और शहरी वोट बैंक के बीच राजनीतिक तालमेल बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

पहले भी बन चुकी है सरकार

अकाली दल और भाजपा का गठबंधन पंजाब में पहले भी सफल रहा है। दोनों दलों ने 1997, 2007 और 2012 में विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनाई थी। हालांकि, 2020 में गठबंधन टूटने के बाद दोनों पार्टियों को अलग-अलग चुनावी रणनीति अपनानी पड़ी।

फिलहाल गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला सामने नहीं आया है, लेकिन महिला आरक्षण और परिसीमन पर अकाली दल के समर्थन तथा सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात ने पंजाब की सियासत में संभावित नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा जरूर तेज कर दी है।


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