ममता के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी के 'अवैध' दफ्तर पर चला बुलडोजर, भारी फोर्स के साथ हो रही कार्रवाई
पश्चिम बंगाल में अभिषेक बनर्जी के कथित अवैध कार्यालय पर प्रशासन का बुलडोजर एक्शन। नोटिस के बाद अमताला-बारुईपुर रोड स्थित भवन के हिस्से को ध्वस्त किया गया।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
शनिवार सुबह प्रशासनिक अधिकारी, नगर निकाय की टीम और भारी पुलिस बल बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंचे। कार्रवाई के दौरान पांच मंजिला इमारत के उस हिस्से को ध्वस्त किया गया, जिसे प्रशासन ने अवैध निर्माण की श्रेणी में बताया। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
पहले जारी किया गया था नोटिस
प्रशासन के अनुसार, दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित इस कार्यालय को लेकर पहले ही नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में भवन निर्माण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज और स्वीकृतियां प्रस्तुत करने को कहा गया था। अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय के भीतर आवश्यक जवाब या दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके बाद नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यह कार्यालय लंबे समय तक डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र से जुड़े संगठनात्मक कार्यक्रमों और बैठकों का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद से इसके नियमित उपयोग में कमी आने की भी चर्चा रही है।
विपक्ष इस कार्रवाई को कानून के पालन से जोड़ रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई के बाद राज्य में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है।
अन्य संपत्तियों को लेकर भी नोटिस
सूत्रों के अनुसार, कोलकाता नगर निगम (KMC) ने अभिषेक बनर्जी, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनी के नाम पर दर्ज कई संपत्तियों को भी नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में भवनों के निर्माण संबंधी दस्तावेज और वैधानिक स्वीकृतियों की जानकारी मांगी गई है। संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई दस्तावेजों की जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि राज्य में अवैध निर्माण और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। वहीं राजनीतिक दलों की निगाहें अब इस मामले के अगले घटनाक्रम और संभावित कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।


