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18वेंब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज: पीएम मोदी बोले, 'ये समूह किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि करता है सबका सम्मान'

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज हो चुका है। भारत मंडपम में सदस्य देशों का खुले दिल से स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि ये समूह किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि सबका सम्मान करने का प्रयास करता है।

18वेंब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज: पीएम मोदी बोले, ये समूह किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि करता है सबका सम्मान
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नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज हो चुका है। भारत मंडपम में सदस्य देशों का खुले दिल से स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि ये समूह किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि सबका सम्मान करने का प्रयास करता है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, "भारत में आप सभी का स्वागत और अभिनंदन करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता, पीपल सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी फर्स्ट अप्रोच पर आधारित है। लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता हमारी प्राथमिकताएं रही हैं। इन प्राथमिकताओं के साथ हमने ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष बल दिया है।"

उन्होंने आगे कहा, "इसी सोच के साथ 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया। लगभग 30 शहरों में आपकी टीमों का स्वागत करने का हमें अवसर मिला। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए मैं आप सभी का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।"

ब्रिक्स के मर्म को समझाते हुए पीएम मोदी ने कहा, "इस वर्ष का ब्रिक्स समिट एक ऐतिहासिक पड़ाव है। हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ बना रहे हैं। मानव जीवन में 20 वर्ष की आयु, मैच्योरिटी और रिस्पॉन्सिबिलिटी के नए चरण का आरंभ करती है। यह वो अवस्था होती है जब सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं। सामर्थ्य को नई दिशा मिलती है। आज ब्रिक्स भी अपने 'कमिंग ऑफ एज' के क्षण में है। पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हम एक-दूसरे के दर्शकों का सम्मान करते हैं और कर्तव्यनिष्ठ से आगे बढ़ते हैं। हम किसी के विरुद्ध नहीं बल्कि सभी को साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं।"

पीएम मोदी ने आगामी 20 वर्षों के रोडमैप की बात करते हुए कहा कि अब समय है कि हम ब्रिक्स में हमारी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलें। अगले 20 वर्षों के लिए हमें एक नए और एम्बिशियस एजेंडा पर काम करना होगा। इसकी शुरूआत हमें अपने खुद के वर्किंग सिस्टम से करनी होगी। ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलती है किंतु इसकी वजह से हमारी संस्थागत गति नहीं रुकनी चाहिए। मैं ब्रिक्स 'निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र' का प्रस्ताव रखता हूं। इसके तहत ट्रोइका के माध्यम से सभी पहलों और परिणामों का फॉलोअप हो सकेगा।"



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