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भाषा को भेद नहीं बनने देना चाहते किसान, सबटाइटल के साथ सोशल मीडिया पर होंगे भाषण

कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन को तेज करने के लिए किसान पूरी तैयारियों में जुट गए हैं। यही कारण है कि बॉर्डर पर बैठे किसान टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर आंदोलन को पूरे देशभर में फैलाना चाहते हैं

भाषा को भेद नहीं बनने देना चाहते किसान, सबटाइटल के साथ सोशल मीडिया पर होंगे भाषण
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गाजीपुर बॉर्डर। कृषि कानून के खिलाफ प्रदर्शन को तेज करने के लिए किसान पूरी तैयारियों में जुट गए हैं। यही कारण है कि बॉर्डर पर बैठे किसान टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर आंदोलन को पूरे देशभर में फैलाना चाहते हैं। दरअसल कृषि कानून के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन में हर वर्ग का किसान है, वहीं विभिन्न प्रदेशों में अलग अलग भाषाओं का इस्तेमाल भी किया जाता है, जिसके कारण अन्य किसान नहीं समझ पाते।

इसी दूरी को खत्म करने के लिऐ इन युवाओं को बुलाया गया है जो किसान नेताओं के भाषण को अलग अलग प्रदेशों तक उन्ही की भाषा में पहुंचाने का काम करेंगे।

बॉर्डर से हर भाषा में किसान मंच से आकर भाषण देते हैं, वहीं अलग-अलग प्रदेशों के नेता भी अपनी भाषा में किसानों को संबोधित करते हैं। वहीं अब सोशल मीडिया पर किसान नेताओं के भाषण के वीडियो को सबटाइटल के साथ लोगों तक पहुंचाने का काम करेंगे।

गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसान नेता जगतार सिंह बाजवा ने आईएएनएस को बताया कि, "हमारा देश विभिन्न भाषाओं का देश है, जिन भाषाओं से आंदोलन में दूरी बन रही है, उसे नजदीक लाने की कोशिश की जा रही है।"

"जब हमारे किसान नेता हिंदी में या अन्य भाषाओं में भाषण देते हैं, तो उस भाषण का वीडियो स्क्रीन पर सबटाइटल के साथ चलाया जा सके, उसकी तैयारी चल रही है।"

सरकार और किसान संगठनों के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। दूसरी ओर फिर से बातचीत शुरू हो इसके लिए किसान और सरकार दोनों तैयार हैं, लेकिन अभी तक बातचीत की टेबल पर नहीं आ पाए हैं।

दरअसल तीन नए अधिनियमित खेत कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।


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