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बाढ़ प्रभावित इलाकों में व्यापक सफाई अभियान जारी

देश के विभिन्न राज्यों के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी उतरने के बाद बीमारी या महामारी फैलने से रोकने के लिये व्यापक सफाई अभियान शुरू किया गया है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में व्यापक सफाई अभियान जारी
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नई दिल्ली । देश के विभिन्न राज्यों के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी उतरने के बाद बीमारी या महामारी फैलने से रोकने के लिये व्यापक सफाई अभियान शुरू किया गया है।

पंजाब में बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित गांवों में कूड़ा-कर्कट हटाने के लिए नगर निगमों के सैंकड़ों सफाई कर्मचारियों के साथ साथ ट्रैक्टर-ट्रालियाँ और अन्य मशीनरी लगाई गई है। अफसरों की निगरानी में सभी गाँवों में सेनिटेशन टीमें बनाईं गई हैं ताकि महामारी के फैलने की रोकथाम के लिए सफाई सुनिश्चित की जा सके।

सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि सफाई टीमों की ओर से बाढ़ के पानी के साथ आये कीचड़, गंदगी, वनस्पति, प्लास्टिक वेस्ट आदि साफ की जा रही है और इन गाँवों में पिछले कुछ दिनों से दिन में दो बार फौगिंग भी की जा रही है।

प्रवक्ता के अनुसार अधिकांश गाँवों में बाढ़ों के पानी का स्तर कम हो गया है जिस कारण सफाई मुहिम चलाना आसान हो गया है और सरकार बाढ़ प्रभावित गाँवों में हालात सामान्य करने के लिए ठोस प्रयास कर रही है।

इस बीच आठ अगस्त के बाद भारी बारिश के कारण बाढ़ एवं भूस्खलन से प्रभावित हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड समेत हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पूर्व मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा, अंडमान निकोबार द्वीप समूह, गुजरात, सौराष्ट्र, कच्छ, तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, कराईकल और केरल में अलग-अलग स्थानों पर अगले 12 घंटे के दौरान तेज बारिश होने के आसार हैं।

मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण पश्चिम मानसून पश्चिम राजस्थान में अति सक्रिय रहा जबकि सौराष्ट्र, कच्छ और केरल में सक्रिय रहा। बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर, मराठवाड़ा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर आंतरिक कर्नाटक में मानसून कमजोर पड़ गया है।

इसके अलावा पश्चिम मध्य और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर, बंगाल की पूर्व-मध्य खाड़ी और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 45-55 किमी प्रति घंटे की तेज रफ्तार से हवा चल सकती है। मछुआरों को इस दौरान समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गयी है।

इस बीच पश्चिमोत्तर क्षेत्र में अगले दो दिन कहीं कहीं बारिश के आसार हैं तथा एक सितंबर को अच्छी बारिश होने की संभावना है। मौसम केन्द्र के अनुसार अगले दो दिन में कहीं कहीं बारिश होने तथा एक सितंबर को कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने मोहाली के सिविल अस्पताल से गुरुवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए तीन मेडिकल राहत वैनों को रवाना किया। इन वैनों में मैडीकल स्पैशलिस्ट, चमड़ी रोगों के विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञों के अलावा पैरा-मैडीकल स्टाफ की टीमें भी भेजी गई हैं। श्री सिद्धू ने यहां बताया कि मेडिकल राहत वैन रोपड़, जालंधर और कपूरथला जिले के बाढ़ प्रभावित गाँवों में मरीज़ों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएगी। इन वैनों के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी तैनात किया गया है।

उन्होंने बताया कि मेडिकल कैंपों में मिलने वाली दवाओं के अलावा हर वैन में पांच हजार और लगभग दो हजार बच्चों को इलाज की सुविधाएं देने के लिए विभिन्न दवाएं भेजी गई है और बाढ़ के पानी से संबंधित बीमारियों को रोकने के लिए दो लाख क्लोरीन की गोलियाँ भी भेजी गई हैं।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से 18 अगस्त से लेकर 28 अगस्त तक आठ जिलों में लगाये गये मेडिकल कैंपों में लगभग 17,000 मरीजों की जांच की जा चुकी है और इन मरीजों में बुख़ार, दस्त, उल्टी, चमड़ी और अन्य रोगों का इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा सर्पदंश, कुत्तों के काटने और अन्य जानवरों के काटने पर बचाव के लिए वैक्सीन भी मुहैया करवाई जा रही है।

उन्होंने बताया कि बाढ़ के कारण मच्छरों से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए 74 वैक्टर बोर्न टीमों का गठन किया गया है जो ठहरे पानी वाले स्थानों पर लारवीसाईड और कीटनाशक दवाओं का छिडक़ाव कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें शहरों और गांवों में स्थानीय निकाय और ग्रामीण विकास विभाग के साथ मिलकर संयुक्त रूप में काम कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रभावित जिलों में पीने के पानी के तुरंत सैंपल लेने की हिदायत भी जारी की है।

श्री सिद्धू ने बताया कि जालंधर और कपूरथला के सबसे अधिक प्रभावित इलाकों को कवर करने के लिए पहले ही प्रति गांव क्रमवार 20 और 21 मेडिकल मोबाइल टीमें तैनात की गई हैं और सिविल सर्जनों को मेडिकल कैंपों के काम-काज पर निजी तौर पर नजऱ रखने के निर्देश दिए गए हैं। पहले ही लगभग 60 लाख क्लोरीन की गोलियां खरीदी गई थीं और अब बाढ़ की स्थिति को देखते हुए 17 लाख और क्लोरीन की गोलियों की खरीद की गई है। दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

पंजाब में जालंधर जिले के बाढ़ प्रभावित गांवों में जलस्तर घटने पर प्रशासन ने पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध करवाने के लिए बडे़ स्तर पर अभियान चलाया और ट्रैक्टर -ट्राेलियों से 200 क्विंटल सूखा चारा भेजा गया है।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विभिन्न राज्यों में बाढ़ प्रभावित इलाकों का खुद जायजा लेंगे और अपने अभियान के तहत वह सात सिंतबर को कर्नाटक का दौरा करेंगे। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य चलाने में सरकार पर विफलता का आरोप लगाते हुए विपक्षी दलों ने राजनीति भी शुरू कर दी है।

कर्नाटक के 23 जिलों में बाढ़ प्रभावितों की मदद में नाकाम रहने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्दारामैया की अगुवाई में गुरुवार को बेंगलुरु मेंं धरना दिया और मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के इस्तीफे की मांग की।
श्री सिद्दारामैया ने जनसभा को संबाेधित करते हुए कहा कि राज्य में बाढ़ प्रभावितों की मदद अगर मुख्यमंत्री नहीं कर सकते हैं तो उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। राज्य सरकार ने खुद ही 108 तालुकों को बाढ़ प्रभावित घोषित किया है लेकिन उनकी मदद के लिए अभी तक कोई भी काम नहीं किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि श्री येदियुरप्पा ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के जरिए सत्ता हथिया कर सफलता तो हासिल कर ली लेकिन वह जरूरतमंद लाेगों की मदद के लिए आगे नहीं आये हैं। उन्हें बाढ़ प्रभावित लोगों से माफी मांगनी चाहिए। केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को किसानों की कोई चिंता नहीं है और इसी वजह से उन्हाेंने एक रुपया भी राज्य के लोगों की मदद के लिए जारी नहीं किया है। राज्य इस समय सबसे विकट हालात का सामना कर रहा है।
गौरतलब है कि कर्नाटक में 1914 में इसी तरह की बाढ़ आई थी और अब 100 वर्षों से अधिक समय के बाद राज्य को इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा है। एक लाख से अधिक लोगों के मकान नष्ट हाे गये हैं और हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसल तबाह हो गई है। इसके अलावा सैंकड़ों मवेशी मारे गए हैं और करोड़ों रुपए की निजी तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ है।

इस बीच श्री येदियुरप्पा ने राज्य में बाढ़ प्रभावित इलाकों को राहत पहुंचाने और पुनर्वास संबंधी कार्यों के लिये केंद्र सरकार से राशि बढ़ाने की उम्मीद जतायी है। उन्होंने कहा कि राज्य में 103 ताल्लुक बाढ़ प्रभावित घोषित की गयीं थी जहां के राहत एवं पुनर्वास संबंधी कार्यों के लिये निधि बढ़ाये जाने की संभावना है।
श्री येदियुरप्पा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात सितंबर को राज्य में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने आ रहे हैं। इस दौरान वह प्रधानमंत्री के समक्ष राज्य के मौजूदा हालात के इस संदर्भ में चर्चा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ में नष्ट हुये घरों के निर्माण के लिये पांच लाख रुपये और क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत संबंधी कार्यों के लिये एक लाख रुपये देगी।
यह संयोग ही था कि श्री येदियुरप्पा जब केआरएस पहुंचे तो सागर का जल अपने अधिकतम स्तर पर था। उस समय केआरएस का जल स्तर अपने अधिकतम स्तर 124.83 फुट तक पहुंच गया था।

उल्लेखनीय है कि देश के विभिन्न हिस्सों में हुई भारी बारिश और बादल फटने के कारण आई बाढ़ तथा भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 386 लाेगों की मौत हुई है जबकि 23 अन्य लापता हैं। इस वर्ष बारिश एवं बाढ़ से उत्तर भारत के हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं जबकि इससे पहले के दौर में हुई बारिश और बाढ़ से दक्षिण भारत के केरल और कर्नाटक सबसे गंभीर तौर पर चपेट में आये थे। हिमाचल में बारिश, बाढ़ एवं भूस्खलन की घटनाओं में अब तक 63 लोगों तथा उत्तराखंड में 62 लोगों की मौत हुई है जबकि छह अन्य लापता हैं जबकि केरल में 125 लोगों की मौत हुई और 17 लोग अब भी लापता हैं। इसके अलावा कर्नाटक में 62, गुजरात में 35, महाराष्ट्र में 30, ओडिशा में आठ तथा आंध्र प्रदेश में नाव पलटने से एक लड़की की मौत हो चुकी है जबकि पश्चिम बंगाल में भारी बारिश के बीच बिजली गिरने से कम से कम आठ लोगों की जानें गयी हैं।


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