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छत्तीसगढ़ के जंगलों का अनुभव यूपी पुलिस खुफिया तंत्र को मजबूती देगा : डीजी यूपी इंटेलीजेंस

'छत्तीसगढ़ के जंगलों में नक्सलियों के सफाये के लिए खुफिया तंत्र को मजबूत करने का अनुभव अब कोशिश करूंगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के खुफिया तंत्र को मजबूत करने के काम ला सकूं

छत्तीसगढ़ के जंगलों का अनुभव यूपी पुलिस खुफिया तंत्र को मजबूती देगा : डीजी यूपी इंटेलीजेंस
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लखनऊ। 'छत्तीसगढ़ के जंगलों में नक्सलियों के सफाये के लिए खुफिया तंत्र को मजबूत करने का अनुभव अब कोशिश करूंगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के खुफिया तंत्र को मजबूत करने के काम ला सकूं। मजबूत खुफिया तंत्र किस कदर दुश्मन के सफाये में कारगर साबित होता है? इसका अनुभव नक्सलियों से आमने-सामने हुई मुठभेड़ों के दौरान मैंने खुद किया था।'

यह सनसनीखेज खुलासा उत्तर प्रदेश पुलिस के नए महानिदेशक (खुफिया) देवेंद्र सिंह चौहान ने किया। यूपी के नए महानिदेशक इंटेलीजेंस डीएस चौहान ने शनिवार को ही पदभार ग्रहण किया। शनिवार रात चौहान आईएएनएस के साथ फोन पर विशेष बातचीत कर रहे थे। देवेंद्र सिंह चौहान 1988 यूपी बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं। 20 मार्च सन 1963 को महाराष्ट्र के सतारा में जन्मे देवेंद्र सिंह चौहान अभी तक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में महानिरीक्षक के पद पर तैनात थे।

हाल ही में आईपीएस देवेंद्र सिंह चौहान को उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापस उनके मूल कैडर में बुलाया था। डीएस चौहान के पिता शिवराम सिंह चौहान चूंकि सतारा सैनिक स्कूल में शिक्षक थे। इसलिए मां शारदा चौहान और पिता शिवराम सिंह चौहान के साथ डीएस चौहान की आंखें भी सतारा के सैनिक स्कूल में ही खुलीं। उन्होंने सतारा सैनिक स्कूल (महाराष्ट्र) से ही प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा ग्रहण की।

हमेशा मीडिया से दूरी बनाकर रखने और एकांतवासी स्वभाव वाले आईपीएएस के रूप में देश में पहचाने जाने वाले यूपी पुलिस के नव-नियुक्त महानिदेशक (खुफिया) डीएस चौहान ने आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत के दौरान एक सवाल के जबाब में कहा, 'हां क्यों नहीं। कई साल तक छत्तीसगढ़ के जंगलों में एंटी नक्सल अभियान की कमान संभालने का अनुभव बतौर डीजी यूपी इंटेलीजेंस जरूर काम आएगा।"

यहां उल्लेखनीय है कि सन 2017 में महानिरीक्षक सीआरपीएफ के पद पर छत्तीसगढ़ में तैनाती के दौरान चौहान की अगुवाई वाली टीमों ने एक नक्सलियों की जमात को घेर लिया। घंटों चली मुठभेड़ के बाद 15 नक्सली उस मुठभेड़ में मारे गए थे। नक्सलियों के एक साथ इतनी बड़ी तादाद में जंगल में छिपे होने की खुफिया सूचना देवेंद्र सिंह चौहान ने ही जुटाई थी।

छत्तीसगढ़ के जंगलों का अनुभव यूपी जैसे बड़े सूबे की पुलिस और जनता के काम कैसे आ पाएगा? पूछे जाने पर डीएस चौहान ने कहा, "छत्तीसढ़ के जंगलों में खुफिया जानकारी जुटाने का अनुभव यूपी पुलिस के बहुत काम आएगा। यह तय है मगर विषय बेहद संवेदनशील होने के कारण इस पर मैं और कुछ नहीं बोल सकता।"

केंद्र सरकार ने बीते मंगलवार को ही आईपीएस देवेंद्र सिंह चौहान को उनके मूल कैडर में वापस भेजने की संस्तुति की थी। उसी के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने शनिवार को यूपी पुलिस में महानिदेशक इंटेलीजेंस का पद संभाल लिया। डीएस चौहान की पत्नी राधा चौहान भी यूपी कैडर की ही 1988 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। 2017 से 2019 तक राधा चौहान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भावी प्रोजेक्ट 'जेम' (गवर्मनेंट ई-मार्केट) की सर्वे-सर्वा रहीं।

फिलहाल राधा चौहान उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा एवं कौशल विकास की प्रमुख सचिव हैं। केंद्र सरकार मोदी जी के 'जेम' प्रोजेक्ट की सफलता का आज भी पूरा श्रेय राधा चौहान को ही देते हैं। जेम को असली रूप में उतारने के वक्त राधा चौहान ही 'जेम' की पहली मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी थीं।


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