ईपीसीएच-डब्ल्यूआईआई ने पश्मीना निर्यातकों को प्रमाणन सेवाएं देने के लिए किया समझौता
पश्मीना निर्यातकों को प्रामाणिक और मान्यता प्राप्त प्रमाणन सेवाएं प्रदान करने के लिए भारतीय हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ, ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने इसकी जानकारी दी है

ग्रेटर नोएडा। पश्मीना निर्यातकों को प्रामाणिक और मान्यता प्राप्त प्रमाणन सेवाएं प्रदान करने के लिए भारतीय हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद और भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ, ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने इसकी जानकारी दी है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान(डब्ल्यूआईआई), देहरादून 1982 में स्थापित भारत सरकार का एक स्वायत्त संस्थान है। जो वन्यजीव अनुसंधान और प्रबंधन में प्रशिक्षण कार्यक्रम, शैक्षणिक पाठ्यक्रम और सलाह प्रदान करता है।
जैव विविधता से संबंधित मुद्दों पर देश भर में सक्रिय रूप से अनुसंधान में लगा हुआ है और पूरे भारत में वन्यजीवों पर शोध करने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और संस्थानों के साथ सहयोग करता है।
यह एमओयू डॉ. एस.पी. यादव, निदेशक-डब्ल्यूआईआई और आर.के. वर्मा, कार्यकारी निदेशक-ईपीसीएच ने बिवाश रंजन, एडीजी, डॉ. रुचि बडोला, वैज्ञानिक-जी, डीन और रजिस्ट्रार, डब्ल्यूआईआई, डॉ. एस.के. गुप्ता, वैज्ञानिक-एफ और नोडल अधिकारी, वन्यजीव फोरेंसिक और संरक्षण आनुवंशिकी,सी. पी. शर्मा, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी, डब्ल्यूएफसीजी सेल, और राजेश रावत, अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक-ईपीसीएच की उपस्थिति मे हस्ताक्षर किये।
इस एमओयू के माध्यम से, डब्ल्यूआईआई देहरादून में ईपीसीएच की टेस्ट लैब चलाने में अपनी तकनीकी जानकारी और सहायता साझा करेगा। इससे ईपीसीएच, पश्मीना निर्यातकों को विदेशी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खरीदार आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उचित समय सीमा के भीतर एक मान्यता प्राप्त परीक्षण और प्रमाणन सेवाएं प्रदान करने में सक्षम होगा।


