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मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता के साथ काम करना शानदार अनुभव रहा, 'लास्ट मैन इन टावर' के निर्देशक बेन रेखी

हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'लास्ट मैन इन टावर' के डायरेक्टर बेन रेखी ने मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता के साथ काम करने का अपना अनुभव शेयर किया है।

मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता के साथ काम करना शानदार अनुभव रहा, लास्ट मैन इन टावर के निर्देशक बेन रेखी
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मुंबई। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'लास्ट मैन इन टावर' के डायरेक्टर बेन रेखी ने मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता के साथ काम करने का अपना अनुभव शेयर किया है।

फिल्म के प्रमोशन के दौरान बेन ने मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता के साथ आईएएनएस से ​​बात की। डायरेक्टर ने कहा कि इन दोनों एक्टर्स को परफॉर्म करते और एक-दूसरे की एनर्जी को समझते हुए देखना उनके लिए बहुत शानदार अनुभव था, और अक्सर उनके लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता था कि वे किसका कौन सा टेक इस्तेमाल करें।

उन्होंने आईएएनएस से ​​कहा, "मुझे लगता है कि बेहतरीन एक्टर्स की एक खूबी यह होती है कि वे सिर्फ दिखावे के लिए परफॉर्म नहीं करते, बल्कि वे दूसरे एक्टर की बात को गहराई से सुनते और समझते हैं। असल में बेहतरीन एक्टिंग का मतलब है रिएक्ट करना और जब आप इन दोनों को साथ लाते हैं, तो उनमें एक गजब का सहजपन देखने को मिलता है। हर टेक अलग होता है। वे एक-दूसरे को देखते हैं और संकेतों को समझते हैं।"

उन्होंने कहा, "यह बहुत इंटेंस (गहरा और असरदार) है। यह इसलिए इतना इंटेंस है, क्योंकि वे एक-दूसरे को बहुत लंबे समय से जानते हैं और दोस्ती का टूटना या धोखा मिलना, ये सब बहुत असली लगता है, लेकिन साथ ही दिल तोड़ने वाला भी होता है। जैसे एक सीन है जिसमें मनोज के किरदार को उसका एक सबसे अच्छा दोस्त धोखा देता है। और उस सीन में मनोज जो करते हैं, वह मुझे हर बार बहुत भावुक कर देता है क्योंकि आप अपनी आंखों के सामने एक जीवनभर की दोस्ती को टूटते हुए देखते हैं।"

उन्होंने कहा, "इसके बारे में सोचकर ही मैं भावुक हो जाता हूं, लेकिन यह वाकई दिल तोड़ने वाला है और यही इसकी ताकत है। यह बहुत अपना-सा लगता है। हम सभी ने कभी न कभी ऐसे हालात का सामना किया है, जहां हमने अपने प्यारे दोस्तों को खोया है और धोखा महसूस किया है। इसलिए यह बहुत ईमानदार लगता है।"

वहीं, 'लास्ट मैन इन टावर' अरविंद अडिगा के इसी नाम के नॉवेल पर आधारित है। इसकी कहानी मुंबई के तेजी से बदलते माहौल पर आधारित है। मनोज एक रिटायर्ड स्कूल टीचर और विधुर (जिनकी पत्नी गुजर चुकी है) का किरदार निभा रहे हैं, जो एक पुराने अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में रहते हैं। जब एक अमीर डेवलपर निवासियों को बिल्डिंग बेचकर एक लग्जरी टावर बनाने के लिए एक आकर्षक डील का ऑफर देता है, तो ज्यादातर लोग पैसे के लालच में आ जाते हैं लेकिन मनोज का किरदार वहां से हटने से इनकार कर देता है और इस तरह वह रीडेवलपमेंट प्लान में अकेली रुकावट बन जाता है।

यह फिल्म अभी सिनेमाघरों में चल रही है।


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