Begin typing your search above and press return to search.
एकता और तुषार कपूर ने क्यों नहीं की शादी, दोनों बने सरोगेसी से माता-पिता, बताई वजह
एकता 50 वर्ष की हो चुकी हैं, जबकि तुषार 49 वर्ष के हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी दोनों के शादी करने की कोई स्पष्ट योजना नजर नहीं आती। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में एकता कपूर ने शादी न करने के पीछे की कहानी साझा की, जो उनके प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।

मुंबई। अभिनेता जितेंद्र के परिवार में एक दिलचस्प समानता है उनके दोनों बच्चे, प्रोड्यूसर एकता कपूर और अभिनेता तुषार कपूर आज भी अविवाहित हैं। एकता 50 वर्ष की हो चुकी हैं, जबकि तुषार 49 वर्ष के हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी दोनों के शादी करने की कोई स्पष्ट योजना नजर नहीं आती। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में एकता कपूर ने शादी न करने के पीछे की कहानी साझा की, जो उनके प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
शादी से बचने के लिए काम शुरू किया
एकता कपूर ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि जब वह 18-19 साल की थीं, तब उनके पिता जितेंद्र ने उनसे साफ शब्दों में कहा था “कुछ काम करो, नहीं तो मैं तुम्हारी शादी कर दूंगा।” एकता के मुताबिक, यह बात उनके लिए एक तरह से प्रेरणा बन गई। उन्होंने कहा, “शादी से बचने के लिए मैंने काम करना शुरू कर दिया। उस समय मैं अपनी जिंदगी का खुलकर आनंद ले रही थी। मेरे दिमाग में बस यही था कि मुझे काम करना है और किसी भी रिश्ते या बंधन में नहीं पड़ना।” दिलचस्प बात यह है कि एकता कपूर ने अपने करियर में 50 से अधिक धारावाहिकों का निर्माण किया है, जिनमें से कई का केंद्रीय विषय शादी और पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। इस पर वह हल्के अंदाज में कहती हैं कि भले ही उन्होंने पर्दे पर सैकड़ों शादियां करवाई हों, लेकिन निजी जीवन में उन्होंने खुद इस रास्ते पर न जाने का फैसला किया।
तुषार कपूर भी रहे अविवाहित
सिर्फ एकता ही नहीं, उनके भाई तुषार कपूर ने भी अब तक शादी नहीं की है। तुषार ने फिल्मों में अभिनय के साथ-साथ डिजिटल और प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी काम किया है। एकता ने बताया कि वह और तुषार दोनों अपने-अपने करियर में इतने व्यस्त हो गए कि शादी का विचार पीछे छूट गया। उन्होंने इसे “किस्मत” का नाम देते हुए कहा कि जीवन ने उन्हें एक अलग दिशा में आगे बढ़ा दिया।
पिता की इच्छा और बच्चों का फैसला
एकता ने इंटरव्यू में एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा आया जब उन्होंने और तुषार ने अपने पिता से इस विषय पर खुलकर बात की। “पापा का मन था कि हम में से कोई एक तो शादी करे,” एकता ने कहा। जब उन्होंने अपने पिता से पूछा कि उन्हें शादी क्यों जरूरी लगती है, तो उनका जवाब था—“बच्चे।” इस पर एकता और तुषार ने व्यावहारिक समाधान निकाला। एकता के अनुसार, उन्होंने अपने पिता से कहा कि अगर बात बच्चों की है, तो वह उसकी योजना बना सकते हैं। इसके बाद दोनों ने विवाह के बिना माता-पिता बनने का रास्ता चुना।
सरोगेसी के जरिए बने माता-पिता
एकता कपूर और तुषार कपूर दोनों ने अलग-अलग सरोगेसी के माध्यम से माता-पिता बनने का निर्णय लिया। एकता के बेटे का नाम रवि कपूर है, जो उनके पिता जितेंद्र के असली नाम रवि कपूर पर रखा गया है। वहीं तुषार कपूर के बेटे का नाम लक्ष्य कपूर है। दोनों भाई-बहन ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि सिंगल पेरेंट बनना आसान फैसला नहीं था, लेकिन यह उनके जीवन का सबसे संतोषजनक निर्णय रहा। एकता अक्सर सोशल मीडिया पर अपने बेटे के साथ बिताए पलों की झलक साझा करती रहती हैं।
करियर रहा प्राथमिकता
एकता कपूर भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक मानी जाती हैं। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, ‘कहानी घर-घर की’, ‘कसौटी जिंदगी की’ जैसे कई लोकप्रिय धारावाहिकों के जरिए उन्होंने टीवी जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। डिजिटल प्लेटफॉर्म और फिल्मों में भी उनकी कंपनी ने कई सफल प्रोजेक्ट दिए हैं। काम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को ही वह अपनी निजी जिंदगी के फैसलों का प्रमुख कारण मानती हैं। तुषार कपूर ने भी फिल्मों और वेब सीरीज में अभिनय के अलावा प्रोडक्शन में हाथ आजमाया है। हालांकि वह अपने बेटे की परवरिश में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं।
बदलती सोच का उदाहरण
एकता और तुषार का निर्णय भारतीय समाज में बदलती पारिवारिक संरचनाओं और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है। जहां एक समय शादी और परिवार को अनिवार्य माना जाता था, वहीं अब कई लोग अपने जीवन के फैसले खुद तय कर रहे हैं। एकता ने अपने बयान में कहीं भी शादी को गलत नहीं ठहराया, बल्कि यह कहा कि उनके लिए काम और स्वतंत्रता प्राथमिक रहे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी के बारे में फैसला लेने का अधिकार है।
अलग रास्ता
फिलहाल एकता कपूर और तुषार कपूर दोनों अपने-अपने पेशेवर प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। शादी को लेकर भविष्य में क्या फैसला होगा, इस पर उन्होंने कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। लेकिन इतना जरूर है कि दोनों ने अपने जीवन की दिशा खुद तय की है—बिना शादी किए भी एक संतुलित पारिवारिक जीवन संभव है, इसका उदाहरण वे पेश कर रहे हैं। इस तरह, जितेंद्र के परिवार की यह कहानी केवल अविवाहित रहने की नहीं, बल्कि अपने तरीके से जीवन जीने और परंपरागत ढांचे से अलग रास्ता चुनने की भी है।
Next Story


