Top
Begin typing your search above and press return to search.

ओटीटी के दौर में बदला भारतीय सिनेमा का चेहरा : पल्लवी चटर्जी

बंगाली सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री पल्लवी चटर्जी ने मनोरंजन जगत में आए बदलावों और करियर के उतार-चढ़ाव पर बात की

ओटीटी के दौर में बदला भारतीय सिनेमा का चेहरा : पल्लवी चटर्जी
X

मुंबई। बंगाली सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री पल्लवी चटर्जी ने मनोरंजन जगत में आए बदलावों और करियर के उतार-चढ़ाव पर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे ओटीटी ने कहानी कहने के तरीके और कलाकारों के लिए उपलब्धियां ला दी हैं।

अभिनेत्री ने कहा, "मैं एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती हूं, जो बचपन से ही इंडस्ट्री को देखती हुई हूं। एक अभिनेत्री के तौर पर सिर्फ डायलॉग्स से परे भी बहुत सी चीजें नोटिस करते हैं। आस-पास के माहौल से सीखने और समझने के लिए बहुत कुछ होता है।"

उन्होंने कहा, "ओटीटी के आने से पहले एक निश्चित उम्र के बाद अभिनेत्रियों के लिए भूमिकाएं बहुत सीमित हो जाती थीं। उन्हें अक्सर एक ही जैसे किरदारों में बांध दिया जाता था। मैं कुछ सार्थक और रचनात्मक करना चाहती थी, इसलिए मैंने प्रोडक्शन की दुनिया में कदम रखा।"

अभिनेत्री ने आगे बताया कि प्रोडक्शन के दौरान उन्होंने सेट पर उपकरण उठाने तक का काम किया है। उनका मानना है कि फिल्म बनाना एक सामूहिक प्रयास है। दर्शक अक्सर फिल्म को अच्छी या बुरी कहकर आसानी से राय बना लेते हैं, लेकिन उसके पीछे की मेहनत, निवेश और भावनाओं को नहीं देखते।

पल्लवी चटर्जी ने कई भाषाई फिल्म इंडस्ट्री में काम किया है। विभिन्न भाषाओं में काम करने के अनुभव को उन्होंने आईएएनएस के साथ साझा किया। उन्होंने बताया कि एक अभिनेता के लिए किरदार सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन भाषा पर पकड़ होना भी उतना ही अनिवार्य है।

उन्होंने कहा, "यदि कोई अभिनेता भाषा में सहज नहीं है, तो उसका पूरा ध्यान अभिनय के बजाय सही संवाद बोलने पर लगा रहता है। मैं हिंदी और बंगाली में सहज हूं, लेकिन जब मैंने उड़िया फिल्म की, तो मैंने वहां के स्थानीय लोगों और तकनीशियनों के साथ घंटों बैठकर अपने उच्चारण को सुधारा। सेट पर जाने से पहले होमवर्क करना हर कलाकार के लिए जरूरी है।"

अभिनेत्री ने आईएएनएस को पुराने और नए दौर की तुलना करते हुए कुछ मुख्य बिंदुओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा, "पहले फिल्में केवल कमर्शियल और आर्ट सिनेमा में बंटी होती थीं और दर्शकों के पास सीमित विकल्प हुआ करते थे। पुरानी तकनीक के मुकाबले आज की तकनीक ने सिनेमा की भव्यता बढ़ा दी है। डिजिटल क्रांति की वजह से आज दर्शक दुनिया भर का बेहतरीन कंटेंट देख रहे हैं। इससे उनकी समझ और उम्मीदें बढ़ गई हैं।"


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it