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सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने खुद को बताया जिम्मेदार मां और शेखर कपूर को हालीडे डैड

सुचित्रा कृष्णमूर्ति और शेखर कपूर की शादी करीब आठ वर्ष तक चली। दोनों के बीच उम्र का लगभग 30 वर्ष का अंतर था। वर्ष 2001 में उनकी बेटी कावेरी कपूर का जन्म हुआ। बाद में दोनों का तलाक हो गया, लेकिन उन्होंने बेटी की परवरिश में मिलकर योगदान देना जारी रखा।

सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने खुद को बताया जिम्मेदार मां और शेखर कपूर को हालीडे डैड
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मुंबई: अभिनेत्री और गायिका सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने हाल ही में एक साक्षात्कार में पूर्व पति और फिल्मकार शेखर कपूर के साथ अपने रिश्ते तथा बेटी कावेरी कपूर की परवरिश को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि तलाक के बाद भी दोनों ने मिलकर अपनी बेटी की परवरिश की, लेकिन जिम्मेदारियों का स्वरूप अलग-अलग रहा। सुचित्रा ने खुद को "फुल-टाइम मां" बताते हुए कहा कि शेखर कपूर बेटी की जिंदगी में हमेशा मौजूद रहे, लेकिन उनकी भूमिका अधिकतर "हॉलिडे डैड" जैसी रही। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अलग हो चुके माता-पिता आपसी सम्मान और अच्छे संबंध बनाए रखें, तो इसका सबसे बड़ा लाभ बच्चे को मिलता है।

तलाक के बाद भी बेटी को मिला दोनों का साथ

सुचित्रा कृष्णमूर्ति और शेखर कपूर की शादी करीब आठ वर्ष तक चली। दोनों के बीच उम्र का लगभग 30 वर्ष का अंतर था। वर्ष 2001 में उनकी बेटी कावेरी कपूर का जन्म हुआ। बाद में दोनों का तलाक हो गया, लेकिन उन्होंने बेटी की परवरिश में मिलकर योगदान देना जारी रखा। साक्षात्कार में सुचित्रा ने कहा कि किसी भी रिश्ते के खत्म होने का असर बच्चों पर कम से कम पड़े, इसके लिए माता-पिता का परिपक्व व्यवहार बेहद जरूरी होता है। उनका मानना है कि बच्चों को दोनों अभिभावकों का प्यार और सहयोग मिलना चाहिए।

'मैं जिम्मेदार मां हूं, वह हॉलिडे डैड'

बेटी की परवरिश में अपनी और शेखर कपूर की भूमिका पर बात करते हुए सुचित्रा ने कहा कि दोनों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने कहा, "मैं जिम्मेदार हूं। मैं फुल-टाइम मां हूं और शेखर हॉलिडे डैड हैं।" उनके अनुसार, सह-पालन (को-पैरेंटिंग) आसान नहीं होता और इसके लिए दोनों पक्षों में समझदारी, धैर्य और जिम्मेदारी की भावना जरूरी होती है। सुचित्रा ने यह भी कहा कि शेखर कपूर एक अच्छे देखभाल करने वाले व्यक्ति हैं और उन्होंने बेटी के साथ हमेशा स्नेहपूर्ण रिश्ता बनाए रखा है।

को-पैरेंटिंग को बताया सबसे बेहतर विकल्प

सुचित्रा कृष्णमूर्ति का मानना है कि तलाक के बाद यदि माता-पिता के बीच संवाद और सम्मान बना रहे तो बच्चे का भावनात्मक विकास बेहतर ढंग से हो सकता है। उन्होंने कहा कि अलग होने के बावजूद यदि दोनों अभिभावक बच्चे के जीवन में सकारात्मक भूमिका निभाते रहें, तो बच्चे को सुरक्षा, विश्वास और भावनात्मक संतुलन मिलता है। उनके अनुसार, को-पैरेंटिंग केवल जिम्मेदारी बांटने का नाम नहीं, बल्कि बच्चे के भविष्य को प्राथमिकता देने का निर्णय है।

कावेरी कपूर ने भी रखा फिल्मी दुनिया में कदम

सुचित्रा और शेखर कपूर की बेटी कावेरी कपूर अब मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने पिछले वर्ष रिलीज हुई फिल्म 'बाबी और ऋषि की लव स्टोरी' से अभिनय की शुरुआत की थी। फिल्म के जरिए कावेरी ने बतौर अभिनेत्री बॉलीवुड में कदम रखा और अब वह अपने करियर के अगले चरण की तैयारी कर रही हैं।

पिता के साथ नई फिल्म में करेंगी काम

कावेरी कपूर जल्द ही अपने पिता शेखर कपूर के निर्देशन में बनने वाली फिल्म 'मासूम... द न्यू जनरेशन' में नजर आएंगी। यह फिल्म शेखर कपूर की चर्चित फिल्म 'मासूम' की नई पीढ़ी पर आधारित कहानी मानी जा रही है। पिता और बेटी का यह पेशेवर सहयोग दर्शकों के बीच पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। फिल्म से जुड़ी अधिक जानकारी का प्रशंसक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

परिवार को दी प्राथमिकता

सुचित्रा कृष्णमूर्ति के ताजा बयान से यह स्पष्ट होता है कि व्यक्तिगत मतभेदों के बावजूद उन्होंने और शेखर कपूर ने अपनी बेटी के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का प्रयास किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रिश्ते बदल सकते हैं, लेकिन माता-पिता की जिम्मेदारी कभी समाप्त नहीं होती। उनका मानना है कि बच्चों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि उन्हें दोनों अभिभावकों का विश्वास, सहयोग और स्नेह मिलता रहे।

परिपक्व सह-पालन की मिसाल

सुचित्रा कृष्णमूर्ति के विचार आधुनिक पारिवारिक रिश्तों में सह-पालन की अहमियत को रेखांकित करते हैं। उनका कहना है कि अलग होने के बाद भी यदि माता-पिता संवाद बनाए रखें और बच्चे के भविष्य को केंद्र में रखकर फैसले लें, तो पारिवारिक परिस्थितियों का बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है। अब जहां कावेरी कपूर अपने अभिनय करियर में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही हैं, वहीं सुचित्रा और शेखर कपूर का सह-पालन का अनुभव उन परिवारों के लिए भी एक उदाहरण माना जा रहा है, जो अलगाव के बाद भी बच्चों की बेहतर परवरिश को प्राथमिकता देते हैं।


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