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सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे फिल्मी सितारे, अनुराग कश्यप और विशाल ददलानी ने उठाई आवाज

संगीतकार और गायक विशाल ददलानी ने भी सोनम वांगचुक के समर्थन में एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि वह इस समय विदेश में हैं, इसलिए जंतर-मंतर पर मौजूद नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन उनका समर्थन पूरी तरह आंदोलन के साथ है।

सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे फिल्मी सितारे, अनुराग कश्यप और विशाल ददलानी ने उठाई आवाज
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नई दिल्ली: शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नीट परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के बीच पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अब फिल्म और संगीत जगत से भी समर्थन मिलने लगा है। वांगचुक लंबे समय से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके आंदोलन को लेकर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बाद अब कई बॉलीवुड हस्तियों ने भी अपनी आवाज बुलंद की है। अभिनेता-निर्देशक अनुराग कश्यप, संगीतकार-सिंगर विशाल ददलानी, स्वरा भास्कर, कुनिका सदानंद, राखी सावंत, अभय देओल और नसीरुद्दीन शाह समेत कई कलाकारों ने वांगचुक के समर्थन में प्रतिक्रिया दी है।

अनुराग कश्यप ने कहा- हर किसी में नहीं होता ऐसा साहस

अनुराग कश्यप ने सोशल मीडिया पर अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए सोनम वांगचुक का समर्थन किया। उन्होंने वांगचुक को साहसी व्यक्ति बताते हुए कहा कि हर किसी के अंदर ऐसा कदम उठाने का साहस नहीं होता। अनुराग ने लिखा कि पहले भूख हड़ताल जैसे कदमों का समाज में अलग महत्व हुआ करता था और लोग इसे तभी अपनाते थे जब कोई गंभीर मुद्दा सामने हो। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यवस्था में आम लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास सोनम वांगचुक जैसा साहस नहीं है, लेकिन वह उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।

प्रशासन की चुप्पी पर उठाए सवाल

अनुराग कश्यप ने अपने दूसरे पोस्ट में प्रशासन और जिम्मेदार लोगों की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुप रहना भी उन्हें सही नहीं लग रहा है। उन्होंने लिखा कि किसी मुद्दे पर लगातार खामोशी कई सवाल खड़े करती है और लोगों की आवाज को सुना जाना चाहिए। अनुराग ने अपने पोस्ट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद और जवाबदेही जरूरी है।

विशाल ददलानी ने वीडियो जारी कर की अपील

संगीतकार और गायक विशाल ददलानी ने भी सोनम वांगचुक के समर्थन में एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि वह इस समय विदेश में हैं, इसलिए जंतर-मंतर पर मौजूद नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन उनका समर्थन पूरी तरह आंदोलन के साथ है। विशाल ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनका संदेश सोनम वांगचुक तक पहुंचाया जाए। उन्होंने वांगचुक से अपील की कि वे अपना अनशन समाप्त करें क्योंकि लगातार भूख हड़ताल से स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से भी आग्रह किया कि वह आंदोलनकारियों की मांगों पर बातचीत करे। विशाल ने कहा कि यह किसी सत्ता परिवर्तन का मुद्दा नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा विषय है।

‘सरकार लोगों की आवाज सुने

विशाल ददलानी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई नागरिक किसी समस्या को लेकर आवाज उठा रहा है तो उसकी बात सुनी जानी चाहिए। अपने वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लोगों से जागरूक होने की अपील की और कहा कि सोनम वांगचुक छात्रों और देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

CJP आंदोलन में शामिल हैं सोनम वांगचुक

सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में शामिल हैं। यह आंदोलन नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, परीक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर किया जा रहा है। CJP की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगें रखी गई हैं। संगठन का कहना है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को अधिक संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

CJP ने लगाया सरकार पर अनदेखी का आरोप

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को लेकर प्रशासन का रवैया निराशाजनक है और सरकार को बातचीत के लिए आगे आना चाहिए।

18 दिनों में घटा 8.9 किलो वजन

CJP के अनुसार, लगातार अनशन के कारण सोनम वांगचुक का वजन लगभग 8.9 किलोग्राम कम हुआ है और अब उनका वजन करीब 57.15 किलोग्राम रह गया है। संगठन का कहना है कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। बुधवार को जारी स्वास्थ्य जानकारी के मुताबिक, उनका ब्लड प्रेशर 105/76, ब्लड शुगर 80 mg/dL और ऑक्सीजन स्तर 97 प्रतिशत दर्ज किया गया। डॉक्टरों के अनुसार वह अभी होश में हैं, लेकिन लंबे समय तक उपवास रहने से स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है।

आंदोलन और बातचीत पर टिकी नजर

सोनम वांगचुक के अनशन को मिले बढ़ते समर्थन के बीच अब नजर इस बात पर है कि आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है। जहां समर्थक शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर समाधान की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर भी उम्मीदें बनी हुई हैं।


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