‘शोले’ का विदेश में भी रहा जलवा, अमिताभ बच्चन ने सुनाया दिलचस्प किस्सा
अमिताभ बच्चन ने ‘कौन बनेगा करोड़पति सीजन 18’ के हालिया एपिसोड में फिल्म से जुड़ी यह जानकारी साझा की। शो के दौरान डॉक्टर गणेश बरैया से बातचीत करते हुए उन्होंने ‘शोले’ के संरक्षण और उसके रीस्टोर वर्जन की इटली में हुई स्क्रीनिंग का जिक्र किया।

मुंबई: भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित और यादगार फिल्मों में शामिल ‘शोले’ की लोकप्रियता रिलीज के 51 साल बाद भी कायम है। 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे। अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, जया बच्चन, अमजद खान और संजीव कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी यह फिल्म आज भी दर्शकों के बीच उतनी ही खास मानी जाती है। अब फिल्म की वैश्विक लोकप्रियता से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा खुद अमिताभ बच्चन ने साझा किया है। उन्होंने बताया कि इटली के बोलोन्या शहर में करीब दो हजार लोगों ने देर रात से सुबह तक ‘शोले’ का रीस्टोर वर्जन देखा।
KBC में अमिताभ ने सुनाया किस्सा
अमिताभ बच्चन ने ‘कौन बनेगा करोड़पति सीजन 18’ के हालिया एपिसोड में फिल्म से जुड़ी यह जानकारी साझा की। शो के दौरान डॉक्टर गणेश बरैया से बातचीत करते हुए उन्होंने ‘शोले’ के संरक्षण और उसके रीस्टोर वर्जन की इटली में हुई स्क्रीनिंग का जिक्र किया। बिग बी ने बताया कि फिल्म को नए सिरे से संरक्षित करने और उसका बेहतर प्रिंट तैयार करने का काम फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन की ओर से किया गया। इस परियोजना का नेतृत्व फिल्ममेकर शिवेंद्र सिंह डूंगरपुर ने किया।
बोलोन्या में रातभर चला फिल्म का प्रदर्शन
अमिताभ बच्चन के मुताबिक, रीस्टोर की गई ‘शोले’ को इटली के बोलोन्या शहर ले जाया गया था। वहां एक बड़े खुले स्थान पर फिल्म की स्क्रीनिंग आयोजित की गई। उन्होंने बताया कि करीब दो हजार इतालवी दर्शक रात करीब 11 बजे से सुबह 3 बजे तक बैठकर फिल्म देखते रहे। बिग बी के लिए यह अनुभव इसलिए भी खास था क्योंकि भाषा और देश की सीमाओं से अलग ‘शोले’ की कहानी और किरदार विदेशी दर्शकों को भी आकर्षित कर रहे थे। यह किस्सा इस बात का उदाहरण है कि भारतीय सिनेमा की कुछ फिल्में अपनी कहानी, संगीत, किरदारों और भावनाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक भी पहुंच बनाने में सफल रही हैं।
फिल्म को रीस्टोर करने की पहल
‘शोले’ को भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है। समय के साथ पुरानी फिल्मों के प्रिंट और फिल्म सामग्री के खराब होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में उन्हें संरक्षित करना फिल्म इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए जरूरी माना जाता है। इसी उद्देश्य से फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन ने ‘शोले’ को रीस्टोर करने की पहल की। रीस्टोरेशन के बाद फिल्म को बेहतर गुणवत्ता के साथ दोबारा दर्शकों के सामने पेश किया गया।
1975 में रिलीज होकर बनी थी सिनेमाई मिसाल
15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई ‘शोले’ का निर्देशन रमेश सिप्पी ने किया था। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने जय और धर्मेंद्र ने वीरू का किरदार निभाया। हेमा मालिनी बसंती और जया बच्चन राधा के रूप में नजर आईं, जबकि अमजद खान का गब्बर सिंह का किरदार भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार खलनायकों में शामिल हो गया। संजीव कुमार ने ठाकुर का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी, संवाद, संगीत और कलाकारों के अभिनय ने इसे उस दौर की बड़ी फिल्मों में शामिल कर दिया।
51 साल बाद भी कायम है क्रेज
‘शोले’ को रिलीज हुए 51 साल पूरे होने के मौके पर अमिताभ बच्चन का यह किस्सा फिल्म की लोकप्रियता का एक अलग पहलू सामने लाता है। भारत में कई पीढ़ियों के दर्शकों की पसंद रही यह फिल्म विदेशों में भी सिनेमा प्रेमियों को आकर्षित करती रही है। बोलोन्या में देर रात तक करीब दो हजार दर्शकों का फिल्म देखना बताता है कि अच्छी कहानी और प्रभावशाली सिनेमा की पहुंच भाषा और भौगोलिक सीमाओं से कहीं आगे तक हो सकती है।


