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मां-बेटों का रिश्ता दोस्ती में बदला, लेकिन जिम्मेदारियां अब भी बरकरार: शेफाली शाह ने साझा किया निजी अनुभव

शेफाली ने बताया कि जब उनके बच्चे छोटे थे, तब उन्होंने अपने करियर से ब्रेक लेकर पूरी तरह से परिवार को प्राथमिकता दी थी। उस समय उनका स्पष्ट निर्णय था कि वह घर पर रहकर बच्चों की परवरिश करेंगी।

मां-बेटों का रिश्ता दोस्ती में बदला, लेकिन जिम्मेदारियां अब भी बरकरार: शेफाली शाह ने साझा किया निजी अनुभव
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मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री शेफाली शाह ने हाल ही में अपने निजी जीवन और मां के रूप में अनुभवों को लेकर एक भावनात्मक किस्सा साझा किया है। दो बेटों की मां शेफाली का कहना है कि समय के साथ उनके और उनके बच्चों के रिश्ते में बदलाव आया है और अब यह रिश्ता केवल मां-बेटे का नहीं बल्कि काफी हद तक दोस्ती जैसा हो गया है। हालांकि जिम्मेदारियां और भावनात्मक जुड़ाव आज भी पहले की तरह ही मजबूत हैं।

शेफाली ने बताया कि जब उनके बच्चे छोटे थे, तब उन्होंने अपने करियर से ब्रेक लेकर पूरी तरह से परिवार को प्राथमिकता दी थी। उस समय उनका स्पष्ट निर्णय था कि वह घर पर रहकर बच्चों की परवरिश करेंगी। उन्होंने कहा कि उस दौर में उन्हें अपने इस फैसले को लेकर कोई पछतावा नहीं था, बल्कि यह उनके जीवन का एक संतोषजनक चरण था। बच्चों के बड़े होने के साथ-साथ उनके जीवन में बदलाव आया और धीरे-धीरे उन्होंने फिर से कामकाज की दुनिया में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की।

अभिनेत्री ने यह भी साझा किया कि अब उन्हें इस बात का दबाव महसूस नहीं होता कि काम की वजह से वह हर समय घर पर मौजूद नहीं रह पातीं, क्योंकि उनके बच्चे अब बड़े हो चुके हैं और अधिक स्वतंत्र हो गए हैं। इसके बावजूद, कई छोटे-बड़े मामलों में बच्चे अब भी उनसे भावनात्मक और व्यवहारिक रूप से जुड़े रहते हैं और उनकी सलाह या मदद पर निर्भर करते हैं।

शेफाली शाह ने अपने करियर के एक यादगार पल का भी जिक्र किया, जो उनके लिए बेहद भावुक और महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने बताया कि जब उनकी चर्चित वेब सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ का पहला सीजन सनडांस फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जा रहा था, तब वह पहली बार किसी अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में शामिल हुई थीं। यह उनके करियर के सबसे खास पलों में से एक था और वह उस अनुभव को आज भी याद करती हैं तो भावुक हो जाती हैं।

उन्होंने बताया कि उस समय थिएटर में माहौल बेहद खास था और जैसे ही शो शुरू होने वाला था, तभी उनके छोटे बेटे का फोन लगातार आने लगा। शुरुआत में उन्होंने फोन नहीं उठाया, लेकिन बार-बार कॉल आने पर उन्होंने आखिरकार फोन उठाया। बेटे ने सिर्फ एक छोटी सी जरूरत बताई—उसे ओटीपी चाहिए था। दिलचस्प बात यह रही कि उनके बेटे ने अपने फोन में शेफाली का नाम भी ‘ओटीपी’ के रूप में सेव कर रखा था, क्योंकि कई जरूरी कोड उनके पास ही आते थे।

शेफाली ने आगे बताया कि समय के साथ उनके छोटे बेटे ने अपने फोन में उनके कॉन्टैक्ट नाम को बदलकर “वेयर आर यू” यानी “कहां हो” कर दिया, जो उनके रिश्ते की बदलती प्रकृति को दर्शाता है। यह छोटा सा बदलाव इस बात का प्रतीक है कि अब उनका रिश्ता औपचारिक मां-बेटे के ढांचे से आगे बढ़कर एक अधिक सहज और दोस्ताना जुड़ाव में बदल चुका है।

अभिनेत्री के अनुसार, यह बदलाव किसी दूरी का संकेत नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जहां बच्चे बड़े होकर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाते हैं, लेकिन मां के साथ उनका जुड़ाव और भरोसा पहले की तरह ही बना रहता है। शेफाली का यह अनुभव कई अभिभावकों के लिए भी एक परिचित एहसास को दर्शाता है, जहां समय के साथ रिश्तों का स्वरूप बदलता है, लेकिन उनकी गहराई कम नहीं होती।


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