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शाहरुख खान ने बताया अगर अभिनेता नहीं बनते तो क्या करते?

कार्यक्रम के दौरान शाहरुख खान ने बताया कि उनका मंगलूरु से विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि उनके दादा इफ्तिखार अहमद इस शहर के बंदरगाह (मंगलूरु पोर्ट) पर चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। इसी कारण उनका परिवार कुछ समय तक यहीं रहा।

शाहरुख खान ने बताया अगर अभिनेता नहीं बनते तो क्या करते?
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मुंबई: हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार शाहरुख खान ने अपने करियर और निजी जीवन से जुड़ा एक दिलचस्प खुलासा किया है। अभिनय की दुनिया में तीन दशक से अधिक समय से दर्शकों का मनोरंजन कर रहे शाहरुख ने कहा कि यदि वह अभिनेता नहीं बनते, तो उनका पसंदीदा पेशा शिक्षण होता। उन्होंने बताया कि उन्हें बच्चों को पढ़ाना बेहद पसंद है और अगर फिल्मों में नहीं आते, तो वह मंगलूरु में एक शिक्षक के रूप में जीवन बिताना पसंद करते। शाहरुख ने यह बात मंगलूरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही, जहां उन्होंने अपने बचपन की यादों और इस शहर से जुड़े अपने पारिवारिक रिश्ते को भी साझा किया।

मंगलूरु से जुड़ी हैं बचपन की यादें

कार्यक्रम के दौरान शाहरुख खान ने बताया कि उनका मंगलूरु से विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि उनके दादा इफ्तिखार अहमद इस शहर के बंदरगाह (मंगलूरु पोर्ट) पर चीफ इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। इसी कारण उनका परिवार कुछ समय तक यहीं रहा। शाहरुख ने बताया कि वह वर्ष 1965 से 1967 के बीच मंगलूरु में रहे थे। हालांकि उस समय वह बहुत छोटे थे, इसलिए उन्हें उस दौर की बहुत अधिक बातें याद नहीं हैं। फिर भी इस शहर से उनका भावनात्मक रिश्ता आज भी बना हुआ है।

शिक्षक बनना था पहला विकल्प

शाहरुख खान ने कहा कि यदि उनका जीवन अभिनय की दिशा में नहीं जाता, तो वह शिक्षा के क्षेत्र में अपना करियर बनाते। उन्होंने कहा, "अगर मैं अभिनेता नहीं होता, तो मंगलूरु में रहकर बहुत खुश रहता। मैं सेंट एलॉयसियस स्कूल, शारदा विद्यालय या माउंट कार्मेल स्कूल जैसे किसी संस्थान में बच्चों को पढ़ा रहा होता। मुझे बच्चों को पढ़ाना बहुत अच्छा लगता है। मैं उन्हें प्यार, खुशी और अच्छे संस्कारों के साथ शिक्षा देता।" उन्होंने आगे कहा कि वह खुद को एक अच्छा शिक्षक मानते और पूरे समर्पण के साथ इस जिम्मेदारी को निभाते।

बच्चों को पढ़ाने का है खास शौक

शाहरुख ने अपने संबोधन में बताया कि उन्हें अपने बच्चों के साथ समय बिताना और उन्हें नई बातें सिखाना हमेशा पसंद रहा है। उनका मानना है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि अच्छे मूल्य, अनुशासन और जीवन जीने का तरीका भी सिखाती है। इसी वजह से यदि उन्हें दूसरा पेशा चुनना पड़ता, तो वह बिना किसी संकोच के शिक्षक बनना पसंद करते।

बचपन की तस्वीर ने जीती महफिल

कार्यक्रम का सबसे भावुक और दिलचस्प पल तब आया, जब शाहरुख खान अपने साथ लाई बचपन की एक तस्वीर दर्शकों को दिखाने लगे। उन्होंने बताया कि उनके बचपन की यह इकलौती तस्वीर है, जो मंगलूरु में ही खींची गई थी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उस दौर में कैमरे आम नहीं थे और तस्वीरें खिंचवाना भी आसान नहीं था। शाहरुख ने जेब से तस्वीर निकालकर लोगों को दिखाई और मजाकिया अंदाज में कहा, "हो सकता है यह तस्वीर आपको थोड़ी अजीब लगे, क्योंकि इसमें मैंने कोई कपड़े नहीं पहने हैं। मैं एक बाल्टी में बैठा हुआ हूं, लेकिन यही मेरे बचपन की सबसे अनमोल याद है।" उनकी इस बात पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों और हंसी के साथ उनका स्वागत किया।

'दीवाना' के 34 साल पूरे

हाल ही में शाहरुख खान की पहली बॉलीवुड फिल्म 'दीवाना' ने रिलीज के 34 वर्ष पूरे किए हैं। वर्ष 1992 में रिलीज हुई इस फिल्म से उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी शुरुआत की थी और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज शाहरुख भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय और सफल अभिनेताओं में गिने जाते हैं। रोमांस, एक्शन, ड्रामा और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई है।

'किंग' की शूटिंग में व्यस्त हैं शाहरुख

इन दिनों शाहरुख खान अपनी आगामी फिल्म 'किंग' की शूटिंग में व्यस्त हैं। इस फिल्म को लेकर उनके प्रशंसकों के बीच काफी उत्साह है। फिल्म से जुड़ी आधिकारिक जानकारी धीरे-धीरे सामने आ रही है और इसे शाहरुख की सबसे चर्चित आगामी परियोजनाओं में माना जा रहा है।

सफलता के बीच भी जमीन से जुड़े शाहरुख

मंगलूरु में अपने संबोधन के दौरान शाहरुख खान ने यह भी दिखाया कि वैश्विक स्तर पर अपार सफलता हासिल करने के बावजूद वह अपनी जड़ों और बचपन की यादों को नहीं भूले हैं। शिक्षक बनने की उनकी इच्छा और बच्चों के प्रति उनका लगाव यह दर्शाता है कि अभिनय के अलावा शिक्षा और समाज से जुड़े मूल्यों को भी वह उतना ही महत्व देते हैं। उनकी यह बातचीत प्रशंसकों के लिए केवल एक दिलचस्प खुलासा नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि किसी भी पेशे की असली पहचान उसमें निहित समर्पण और सेवा की भावना से होती है।


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