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गिटारिस्ट बनने गए थे, गायक बनकर लौटे: विशाल डडलानी की किस्मत बदल देने वाली कहानी

विशाल डडलानी का संगीत से जुड़ाव अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे विकसित हुआ। वह बताते हैं कि एक बार उन्हें कुछ दोस्तों के साथ गोवा जाना पड़ा। उसी दौरान उनके एक दोस्त को गिटार बजाते देखकर उनमें इस वाद्य यंत्र के प्रति रुचि जागी।

गिटारिस्ट बनने गए थे, गायक बनकर लौटे: विशाल डडलानी की किस्मत बदल देने वाली कहानी
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मुंबई: अक्सर कहा जाता है कि किस्मत इंसान को वहां पहुंचा देती है, जहां उसे होना चाहिए। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर संगीतकार और गायक विशाल डडलानी की जिंदगी इस कहावत का सटीक उदाहरण है। आज ‘विशाल-शेखर’ की जोड़ी के रूप में पहचान बना चुके विशाल का करियर एक ऐसे मोड़ से शुरू हुआ, जिसकी उन्होंने खुद भी कल्पना नहीं की थी।

गिटार से शुरू हुआ संगीत का सफर

विशाल डडलानी का संगीत से जुड़ाव अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे विकसित हुआ। वह बताते हैं कि एक बार उन्हें कुछ दोस्तों के साथ गोवा जाना पड़ा। उसी दौरान उनके एक दोस्त को गिटार बजाते देखकर उनमें इस वाद्य यंत्र के प्रति रुचि जागी। गोवा से लौटने के बाद उन्होंने गिटार सीखने का फैसला किया। मुंबई आकर उन्होंने गिटार के केवल दो लेसन लिए, लेकिन इसके बाद परिस्थितियों ने उनकी सीखने की प्रक्रिया को एक अलग दिशा दे दी।

1992 के दंगों के बीच संगीत की साधना

साल 1992 में मुंबई दंगों की वजह से लगभग ठप हो गई थी। उस समय शहर की गतिविधियां रुक गई थीं, लेकिन विशाल के लिए यह समय संगीत के साथ गहराई से जुड़ने का बन गया। वह बताते हैं कि इस दौरान वह और उनका एक दोस्त अक्सर एक चाय-नाश्ते की दुकान में बैठकर गिटार बजाया करते थे। यह कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं था, बल्कि जुनून और अभ्यास का एक अनोखा मेल था। यही वो दौर था जब विशाल ने बिना किसी दबाव के संगीत को महसूस करना शुरू किया और अपनी कला को निखारा।

ऑडिशन जिसने बदल दी जिंदगी

करीब छह महीने बाद विशाल को एक व्यक्ति ने बैंड में गिटार वादक के तौर पर ऑडिशन देने के लिए बुलाया। वह इस मौके को लेकर उत्साहित थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि यह उनके गिटारिस्ट बनने के सफर की शुरुआत हो सकती है। लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था।जब वह ऑडिशन के लिए पहुंचे, तो वहां पहले से चार-पांच लोग मौजूद थे और एक व्यक्ति गाना गा रहा था। विशाल चुपचाप यह सब देख रहे थे। जैसे ही वह गाना खत्म हुआ, वहां मौजूद एक अन्य गिटार प्लेयर ने विशाल से पूछा, “क्या तुम गा सकते हो?”

माइक मिला और बदल गया करियर

इस सवाल ने विशाल को थोड़ा चौंकाया, लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास के साथ ‘हां’ कहा। इसके बाद उस व्यक्ति ने उनकी ओर माइक बढ़ा दिया। विशाल ने माइक थामा और गाना गाया। यही वह पल था जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। उनकी आवाज और प्रस्तुति से प्रभावित होकर उन्हें गिटारिस्ट नहीं, बल्कि गायक के रूप में बैंड में शामिल कर लिया गया।

पेंटाग्राम और शेखर से पहली मुलाकात

जिस बैंड में विशाल शामिल हुए, वह आगे चलकर ‘पेंटाग्राम’ के नाम से जाना गया। इस बैंड में कीबोर्ड बजाने वाले कलाकार थे शेखर रवजियानी, जो बाद में विशाल के साथ मिलकर बॉलीवुड की मशहूर संगीतकार जोड़ी ‘विशाल-शेखर’ का हिस्सा बने। बैंड में ड्रम्स की जिम्मेदारी सिराज संभालते थे, जो पेंटाग्राम के प्रमुख ड्रमर रहे। इस तरह यह बैंड न केवल विशाल के करियर की शुरुआत बना, बल्कि उनके भविष्य के सहयोगों की नींव भी यहीं पड़ी।

एक मौके ने बनाई पहचान

विशाल डडलानी मानते हैं कि अगर वह उस दिन ऑडिशन के लिए नहीं जाते, या गाने के लिए ‘हां’ नहीं कहते, तो शायद उनका करियर बिल्कुल अलग दिशा में जाता। उनके शब्दों में, “मैं कह सकता हूं कि मेरा पूरा करियर उसी ऑडिशन से शुरू हुआ।” यह बयान इस बात को दर्शाता है कि कभी-कभी जिंदगी के छोटे-छोटे फैसले बड़े बदलाव की वजह बन जाते हैं।

किस्मत और मेहनत का मेल

विशाल की कहानी केवल किस्मत की नहीं, बल्कि मेहनत और मौके को पहचानने की भी है। अगर उन्होंने गिटार सीखने की शुरुआत न की होती, या दंगों के दौरान अभ्यास न किया होता, तो शायद वह उस ऑडिशन तक पहुंच ही नहीं पाते। साथ ही, जब उन्हें गाने का मौका मिला, तो उन्होंने बिना झिझक उसे अपनाया, यही उनका सबसे बड़ा turning point साबित हुआ।

हर मौका महत्वपूर्ण

विशाल डडलानी का सफर यह सिखाता है कि जिंदगी में हर मौका महत्वपूर्ण होता है, भले ही वह आपकी योजना का हिस्सा न हो। गिटारिस्ट बनने का सपना लेकर गए एक युवक का गायक बन जाना और आगे चलकर संगीत की दुनिया में बड़ा नाम बनाना, यह दिखाता है कि किस्मत और मेहनत जब साथ आते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

उनकी कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी बताती है कि अपने हुनर पर भरोसा रखना और हर अवसर को खुले मन से स्वीकार करना सफलता की कुंजी हो सकता है।


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