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एआर रहमान के बयान पर वहीदा रहमान बोलीं: ऐसी छोटी-छोटी चीजें हर देश में होती हैं, ये मुल्क हमारा है, बस खुश रहो

वहीदा रहमान ने कहा कि उन्होंने ए.आर. रहमान के बयान के बारे में पढ़ा जरूर है, लेकिन वह जानबूझकर ऐसी चर्चाओं से दूरी बनाए रखती हैं। उन्होंने कहा, “जब सब कुछ ठीक चल रहा हो तो मैं इस तरह की बातों पर ध्यान नहीं देना पसंद करती हूं। ये छोटी-छोटी बातें हर देश में होती हैं।”

एआर रहमान के बयान पर वहीदा रहमान बोलीं: ऐसी छोटी-छोटी चीजें हर देश में होती हैं, ये मुल्क हमारा है, बस खुश रहो
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मुंबई। बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान ने संगीतकार ए.आर. रहमान के उस बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कम काम मिलने के पीछे “सांप्रदायिक भेदभाव” की संभावना जताई थी। वहीदा रहमान ने इस पूरे विवाद से खुद को अलग रखते हुए संयमित और सुलझा हुआ दृष्टिकोण अपनाया है। उनका कहना है कि ऐसे मुद्दों में उलझने के बजाय शांति और संतुलन बनाए रखना ज्यादा जरूरी है।

‘इन बातों से दूरी बनाना ही बेहतर’

वहीदा रहमान ने कहा कि उन्होंने ए.आर. रहमान के बयान के बारे में पढ़ा जरूर है, लेकिन वह जानबूझकर ऐसी चर्चाओं से दूरी बनाए रखती हैं। उन्होंने कहा, “जब सब कुछ ठीक चल रहा हो तो मैं इस तरह की बातों पर ध्यान नहीं देना पसंद करती हूं। ये छोटी-छोटी बातें हर देश में होती हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मामलों में सच्चाई को पूरी तरह समझ पाना मुश्किल होता है। “किस पर भरोसा करें और कितना भरोसा करें? यह बात सच है या नहीं, यह भी नहीं पता। ऐसे मामलों में क्यों उलझना? खासकर मेरी उम्र में मैं किसी विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहती।”

‘यह देश हमारा है, खुश रहना जरूरी’

वहीदा रहमान ने अपने बयान में देश और समाज के प्रति सकारात्मक नजरिया भी रखा। उन्होंने कहा, “अपनी शांति से रहो। यह मुल्क हमारा है, बस खुश रहो। मैं बस इतना ही कह सकती हूं।” उनका यह बयान सोशल मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में एक संतुलित और परिपक्व प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

बदलते वक्त को भी बताया वजह

वहीदा रहमान ने ए.आर. रहमान को कम काम मिलने की संभावित वजह के तौर पर बदलते समय और इंडस्ट्री के ट्रेंड्स की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, “काम तो ऊपर-नीचे होता ही रहता है। एक उम्र के बाद लोग कहते हैं कि कुछ नया या अलग लेकर आइए। ऐसे में कई बार कुछ लोग पीछे रह जाते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि यह जरूरी नहीं कि जो लोग एक समय बहुत ऊंचाई पर पहुंच गए हों, वे हमेशा वहीं बने रहें। “उतार-चढ़ाव तो चलता ही रहता है, इसमें कोई नई बात नहीं है।”

ए.आर. रहमान ने क्या कहा था?

दरअसल, ए.आर. रहमान ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में बॉलीवुड में पक्षपात और बदलते सत्ता संतुलन पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि पहले शायद उन्हें इसका अहसास नहीं हुआ, या यह छुपा हुआ था, लेकिन पिछले आठ वर्षों में स्थिति बदली है। रहमान ने कहा, “अब ऐसे लोगों के पास ताकत है जो रचनात्मक नहीं हैं। यह सांप्रदायिक भी हो सकता है, लेकिन यह सीधे तौर पर मेरे सामने नहीं आता। मुझे बस अफवाहों के जरिए पता चलता है कि मुझे बुक किया गया था, लेकिन बाद में म्यूजिक कंपनी ने पांच और कंपोजर को हायर कर लिया।”

बयान के बाद बढ़ा विवाद

ए.आर. रहमान के इस बयान के बाद फिल्म इंडस्ट्री में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। गीतकार जावेद अख्तर, गायक शान, संगीतकार शंकर महादेवन और अभिनेत्री कंगना रनौत समेत कई हस्तियों ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। किसी ने रहमान के अनुभवों को गंभीरता से लेने की बात कही तो किसी ने इसे इंडस्ट्री की सामान्य प्रक्रिया बताया।

सोशल मीडिया पर दी सफाई

विवाद बढ़ने के बाद ए.आर. रहमान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “भारत मेरी प्रेरणा है, मेरा गुरु है और मेरा घर है। कभी-कभी बातों को गलत समझ लिया जाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकसद कभी किसी को ठेस पहुंचाना नहीं था। “मेरा उद्देश्य हमेशा संगीत के जरिए सम्मान और सेवा करना रहा है।”

संतुलन और संवाद की जरूरत

वहीदा रहमान की प्रतिक्रिया को कई लोग एक वरिष्ठ कलाकार की परिपक्व सोच के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि हर विवाद का जवाब सार्वजनिक बहस से देना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी दूरी बनाकर शांति से रहना ही सबसे समझदारी भरा रास्ता होता है। फिल्म इंडस्ट्री में जहां विचारों और अनुभवों की टकराहट आम बात है, वहीं यह विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि बदलते दौर में रचनात्मकता, अवसर और पहचान का संतुलन कैसे बने। वहीदा रहमान का संदेश साफ है- विवादों से ऊपर उठकर शांति, संयम और सकारात्मकता को प्राथमिकता देना।


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