मशहूर गायिका सुमन कल्याणपुर का निधन, 89 वर्ष की उम्र में थमी सुरों की मधुर यात्रा, लता मंगेशकर से होती थी तुलना
सुमन कल्याणपुर भारतीय सिनेमा के उस दौर की प्रमुख आवाजों में शामिल थीं, जब फिल्म संगीत अपने स्वर्णिम काल से गुजर रहा था। उन्होंने अपने लंबे करियर में फिल्मी और गैर-फिल्मी मिलाकर 3,000 से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी।

मुंबई: भारतीय संगीत जगत की दिग्गज पार्श्व गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम मुंबई में निधन हो गया। वह 89 वर्ष की थीं। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। अपनी मधुर और भावपूर्ण गायकी के लिए पहचानी जाने वाली सुमन कल्याणपुर ने कई दशकों तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया।
उनकी करीबी मित्र और लेखिका मंगला खाडिलकर के अनुसार, सुमन कल्याणपुर ने रविवार रात करीब 8 बजे शांतिपूर्वक दुनिया को अलविदा कहा। बताया गया कि अपने जीवन के अंतिम दिनों में वह अपने ही गाए हुए गीत सुन रही थीं। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को मुंबई के पवनहंस श्मशान घाट में किया जाएगा।
छह दशकों से अधिक लंबा रहा संगीत सफर
सुमन कल्याणपुर भारतीय सिनेमा के उस दौर की प्रमुख आवाजों में शामिल थीं, जब फिल्म संगीत अपने स्वर्णिम काल से गुजर रहा था। उन्होंने अपने लंबे करियर में फिल्मी और गैर-फिल्मी मिलाकर 3,000 से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी गायकी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी। उन्होंने रोमांटिक, भावुक, भक्ति, लोक और बच्चों के गीतों से लेकर तेज रफ्तार धुनों वाले गीत भी समान सहजता के साथ गाए।
हिंदी फिल्म उद्योग में उन्होंने 850 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए। उनकी आवाज की मिठास और स्पष्ट उच्चारण ने उन्हें संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाया। यही कारण है कि दशकों बाद भी उनके गाने लोगों की जुबान पर बने हुए हैं।
1960 और 1970 के दशक में बनाई अलग पहचान
सुमन कल्याणपुर ने विशेष रूप से 1960 और 1970 के दशक में अपनी गायकी से अलग पहचान स्थापित की। उस समय संगीत जगत में लता मंगेशकर का दबदबा था, लेकिन इसके बावजूद सुमन ने अपनी प्रतिभा के दम पर श्रोताओं के बीच खास स्थान बनाया। उनके कई गीत आज भी सदाबहार माने जाते हैं। ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’ और ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ जैसे गीत उनकी लोकप्रियता के प्रतीक हैं। इन गीतों ने उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे पसंदीदा आवाजों में शामिल कर दिया।
कई भाषाओं में दी अपनी मधुर आवाज
सुमन कल्याणपुर की प्रतिभा केवल हिंदी गीतों तक सीमित नहीं थी। उन्होंने मराठी, बंगाली, कन्नड़, असमी, ओडिया और अन्य भारतीय भाषाओं में भी अनेक गीत गाए। विभिन्न भाषाओं में गायन की उनकी क्षमता ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाया। उनके गीतों में भावनाओं की गहराई और सुरों की शुद्धता साफ झलकती थी। यही वजह रही कि अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के श्रोता भी उनकी आवाज से जुड़ाव महसूस करते थे।
लता मंगेशकर से तुलना पर क्या कहती थीं सुमन?
सुमन कल्याणपुर की आवाज की तुलना अक्सर स्वर कोकिला लता मंगेशकर से की जाती थी। कई संगीत प्रेमियों को उनकी आवाज में लता की झलक महसूस होती थी। हालांकि, सुमन कल्याणपुर ने हमेशा इस तुलना को महत्व नहीं दिया। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि लता मंगेशकर उनकी बेहद करीबी मित्र थीं और उनसे मिलना किसी अच्छी सहेली से मिलने जैसा अनुभव होता था। उन्होंने हमेशा अपनी पहचान अपनी मेहनत और गायकी के आधार पर बनाने की कोशिश की। संगीत के प्रति उनका समर्पण और विनम्र स्वभाव उन्हें अन्य कलाकारों से अलग बनाता था।
पद्मभूषण से हुआ था सम्मानित
भारतीय संगीत में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2023 में उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके दशकों लंबे संगीत सफर और भारतीय संगीत संस्कृति को समृद्ध बनाने में निभाई गई भूमिका की स्वीकृति था।
हमेशा याद रहेंगी सुमन कल्याणपुर
सुमन कल्याणपुर का निधन भारतीय संगीत जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उनकी मधुर आवाज, सादगी और संगीत के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। भले ही वह अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाए हजारों गीत हमेशा श्रोताओं के दिलों में जीवित रहेंगे। भारतीय संगीत के इतिहास में उनका नाम सदैव सम्मान और आदर के साथ लिया जाएगा।


